मंत्री के बिगड़े बोल

193
0
SHARE

मोतिहारी – एक ओर जहां पूरा देश पूर्व प्रधान मंत्री के दिवंगत होने के बाद शोक में डूबा है. वहीं सूबे के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने इस मौके पर भी राजनीति शुरू कर दी है. भाजपा द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में केन्द्रीय विश्व के उस प्रोफ़ेसर को खुली धमकी दे डाली. जिस प्रोफ़ेसर ने पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मौत पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया था. यही नहीं पत्रकारों से बात करते हुए प्रोफ़ेसर की पिटाई करने वालों की तरफदारी भी मंत्री ने की. मंत्री के यह बिगड़े बोल भाजपा के लिए सिर दर्द भी साबित हो सकता है.

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मौत के बाद मोतिहारी केन्द्रीय विश्व विद्यालय के प्रोफेसर संजय कुमार द्वारा सोशल मिडिया पर किया गया पोस्ट अब तुल पकड़ चूका है. मंत्री और विभिन्न दलों के नेता इस मामले को हवा देने में लगे है. विपक्ष इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरने में लगी है. तो सत्ता पक्ष के मंत्री और नेता पोस्ट करने वाले प्रोफ़ेसर को खुले मंच से धमकी भी दे रहे है. सूबे के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने भी इस मामले पर अपनी राजनीति शुरू कर दिया है. उन्होंने प्रोफ़ेसर को खुले मंच से धमकी देते हुए जिला प्रशासन और विश्व विद्यालय प्रशासन को असहिष्णुता फैलाने वाले प्रोफ़ेसर के ऊपर कार्रवाई करने की बात कहते है. मंत्री यहीं पर नहीं रुके उन्होंने पत्रकारों पर भी इस मामले में एक पक्षीय रिपोर्टिंग करने का आरोप मढ दिया.

दरअसल, मोतिहारी के नगर भवन में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शोक सभा का आयोजन किया गया था. जिसमें केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी उपस्थित थे. इस शोक सभा में भी सूबे के पर्यटन मंत्री अपनी राजनीति रोटी सेंकने से बाज नहीं आये. शोक सभा के मंच से प्रोफ़ेसर को राष्ट्र विरोधी बताते रहे. कार्यक्रम के बाद जब पर्यटन मंत्री से इस बाबत पूछा गया. तो उन्होंने प्रोफ़ेसर के साथ मारपीट करने वाले असामाजिक तत्वों की तरफदारी की. यही नहीं प्रोफ़ेसर के साथ हुई मारपीट की घटना को तू-तू, मैं-मैं की घटना बता रहे हैं. जबकि जख्मी प्रोफ़ेसर की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज पटना में चल रहा है.

बहरहाल, सत्याग्रह की भूमि पर हिंसा फैलाने वालों का समर्थन करना एक मंत्री के लिए कितना उचित है. यह तो अब लोग तय करेंगे. लेकिन अहिंसा के पुजारी गांधी की कर्म भूमि पर किसी के विचार का वैचारिक ढंग से विरोध करने के बजाए उसका जवाब हिंसा से देना समाज का गलत दिशा में बढ़ने की ओर इशारा कर रहा है.