बिहार से दफ़्तर समेट लेने की बात पर बोले प्रशांत किशोर, कहा- मेरे दफ्तर में 200 लोग कर रहे काम

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patna: प्रशांत किशोर से जुड़ी खबरें आ रही हैं कि बिहार से अपनी Ipac (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तर को समेट लिया है। प्रशांत किशोर के दफ्तर में ताला लग गया है और उनके सारे स्टाफ को दूसरे जगह शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन इस बात का खंडन करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह खबर झूठ है, अभी मेरे दफ्तर में 200 लोग काम कर रहे हैं. वहीं ‘बात बिहार की’ पेज को लेकर प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनके पेज की लोकप्रियता बिहार के राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा है।

 BJP ने ट्वीट कर प्रशांत किशोर पर किया था हमला।

बिहार बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद  ने ट्वीट कर प्रशांत किशोर पर बड़ा हमला बोला था। कहा था: “भाई! ये पीके सिर्फ पैसा लेके काम करता है और जितना पैसा लेता है उतना ही काम करता है। इनकी कोई सामाजिक और वैचारिक निष्ठा नहीं है, सिर्फ राजनीतिक दलाली करना ही मूल काम है। जब पीके को पैसा मिल रहा है पश्चिम बंगाल और दिल्ली में दीदी-भैया के मेकओवर का तो बिहार में क्यों दुकान सजायेगा!?!”

बता दें कि प्रशांत किशोर की कंपनी का नाम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (ipac) है। यह कंपनी विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने के लिए काम करती है. प्रशांत किशोर को पीएम नरेंद्र मोदी के लिए बढ़िया मार्केटिंग और विज्ञापन अभियान बनाने का श्रेय दिया जाता है। कहा जाता है कि ‘चाय पे चर्चा’ 3 डी रैली, रन फॉर यूनिटी और कई सोशल मीडिया कार्यक्रमों के जरिये उन्होंने पीएम मोदी के छवि को चमकाने का काम किया था। 2014 लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर पीएम मोदी के टीम में सबसे महत्वपूर्ण थे। प्रशांत किशोर की ipac कंपनी ने बिहार, पंजाब चुनावों में चुनावी रणनीतिकार एजेंसी के तौर पर काम किया था। बता दें कि ipac अभी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के पार्टी के साथ काम कर रही है।

जेडीयू ने प्रशांत किशोर को पार्टी से बाहर कर दिया था. प्रशांत किशोर लगातार पार्टी लाइन से अलग बयान दे रहे थे जिसके बाद जेडीयू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से अलग कर दिया था. सिटिजन अमेंडमेंट बिल का जेडीयू ने संसद में समर्थन किया था जिसके बाद प्रशांत किशोर ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर जाहिर की थी.