प्रवासी बिहारियों को लाने की कहीं राज्य सरकार और जनता को चुकानी ना पड़ जाए बड़ी कीमत

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DESK: देश में कोरोना के बढ़ते खतरे के मद्देनजर केंद्र ने 23 मार्च से पूरे भारत में सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी. लॉकडाउन की स्तिथि में जीने के लिए एकदम अनिवार्य वस्तुओं को छोड़ कर बांकी सभी चीजों को बंद कर दिया गया. जैसे स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा घर, जिम, पार्क्स, कोचिंग संस्थान इत्यादि. वहीं लॉकडाउन के तहत हर तरह के अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया.

लॉकडाउन की स्तिथि में सभी तरह के काम बंद होने से सबसे ज्यादा दिक्कत समाज के गरीब तबके के लोगों को हुई. काम नहीं मिलने की वजह से उनके सामने आर्थिक संकट और भुखमरी की स्तिथि उत्पन्न हो गई. ऐसे में मजदूरों ने मजबूरन पलायन करना शुरू कर दिया. पलायन करने में वालों में अधिकतर मजदूर बिहार के थे. कोई साधन नहीं होने की वजह से वे पैदल ही हज़ारों किलोमीटर की सफर अपने गांव पहुंचे.

इधर देश में कोरोना का प्रकोप बढ़ता गया और साथ ही साथ लॉकडाउन भी. 21 दिनों का लॉकडाउन बढ़ते-बढ़ते अब 50 दिनों का होने वाला है. ऐसे राज्य के बाहर फंसे मजदूरों को वापस लाने की लगातार उठते मांगों को देखते हुए राज्य सरकार मजदूरों को स्पेशल ट्रेन से वापस ला रही है और हर वो प्रयास कर रही है जिससे राज्य में कोरोना की स्तिथि अंडर कंट्रोल रहे.

लेकिम पिछले कुछ दिनों में देखा जाए तो राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों में बहुत तेजी से वृद्धि हुई. नए मरीजों में कई ऐसे मरीज हैं जो बाहर से राज्य लौटे हैं. यह स्तिथी तब उभर कर आई है जब सारे मजदूर जो लौट रहे हैं उन सभी का रैंडम जांच किया जा रहा है. अगर सभी का बकायदे जांच किया जाए तो राज्य में स्थिति और भी भयावह हो सकती है.

सूबे के मुखिया सीएम नीतीश ने पीएम मोदी से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद कोरोना के बढ़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है. वहीं राज्य में सीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक संख्या में प्रवासियों का जांच किया जाए जिससे उनके संक्रमित होने या ना होने का पता चल सके. लेकिन यह सब तो कोरी बातें जिनके जमीनी स्तर पर उतारने में काफी समय लग जायेगा.

बहरहाल देखा जाए तो बिहार एक ऐसा राज्य है जहां संसाधनों की कमी रही है. यही वजह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ. अब मुश्किल परिस्तिथि में सभी वापस लौट रहे हैं. लेकिन राज्य में उनके समुचित जांच की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में कोरोना संक्रमण के पूरे राज्य में आग जैसे फैलने की आशंका है. राजनीतिक प्रेशर में सीएम नीतीश ने भले ही प्रवासी मजदूरों को लाने की व्यवस्था की है और ला भी रहे हैं, लेकिन कहीं प्रवासी मजदूरों को लाना सरकार की बड़ी गलती ना साबित हो जाए, जिसका खामियाजा पूरे राज्य को भुगतना पड़े.