शराबबंदी कानून में हो सकता है संशोधन : सीएम नीतीश

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पटना: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में सभी दलों ने यह माना कि शराबबंदी राज्य के लिए जरूरी है। उन्होंने एकजुटता दिखाई। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा को सजा के कुछ प्रावधानों पर एतराज था। सरकार ने कहा, विचार होगा।

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विधानसभा स्थित पुस्तकालय कक्ष में नए मद्य निषेध कानून 2016 के संबंध में सर्वदलीय बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा. प्रेम कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी सहित कुल 22 विधायकों व विधान पार्षदों ने अपनी बात रखी। सभी दलों के विधायकों व विधान पार्षदों ने एक सुर में कहा कि वे शराबबंदी का पूरा समर्थन करते है। यह बिहार के लोगों के हित में है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार किया कि कानून में संशोधन होते रहते हैं। शराबबंदी बिहार में एक सामाजिक क्रांति है। इसके पक्ष में हमें एकजुट रहना चाहिए। इससे बिहार में एक नया माहौल बन रहा है। मतभिन्नता होने से गलत करने वालों का हौसला बढ़ता है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिसमें संशोधन नहीं हुए हों। संविधान में भी संशोधन हुआ है। उन्होंने कहा कि यह तो स्पष्ट है कि सभी पार्टियां शराबबंदी के पक्ष में है। अगर कोई कानून अतिवादी है तो यह बताएं कि उसके बदले क्या होना चाहिए। अगर ठोस सुझाव है तो आगे उस पर विचार के बाद निर्णय लिया जा सकता है। जनचेतना और कानून की सख्ती दोनों शराबबंदी के लिए आवश्यक है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ प्रेम कुमार ने कहा था कि हम काफी पहले से कह रहे थे कि शराबबंदी के नए कानून के बारे में सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए। भाजपा सहित एनडीए में शामिल सभी दल शराबबंदी का समर्थन करते है पर कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जो तालिबानी है। सरकार उन प्रावधानों को बदले।

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उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि इस कानून को तालिबानी कानून कहना गलत है। तालिबानी कानून मानवता के खिलाफ है जबकि शराबबंदी का वास्ता मानवता से है। शराबबंदी का कानून अगर मजबूत नहीं होगा तो फिर गलती की आशंका रहेगी।

भाकपा विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से सरकार के इस फैसले के साथ है। कानून को तो कड़ा ही रहना चाहिए तभी इसका असर होता है। कांग्रेस के नेता शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने शराबबंदी के कानून में कुछ राहत की बात की है। इस मसले पर सरकार विधि विशेषज्ञों की राय लेगी।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी भाजपा के स्टैंड का समर्थन किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह शराबबंदी कानून के मसले पर नीतीश कुमार के समर्थन में है। पर सजा के कई प्रावधान ऐसे है जो खत्म होने चाहिए।

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि इस बैठक में 22 जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी लोगों ने नये कानून पर अपने-अपने सुझाव दिये हैं। कई लोगों ने लिखित रूप में भी अपना सुझाव सौंपा है। सभी सुझावों का सरकार समीक्षा करेगी। इसके बाद सार्थक सुझावों पर संज्ञान लिया जायेगा। सरकार इन पर अमल करेगी। सभी जनप्रतिनिधियों ने कई सारे बिंदुओं पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की है। इन पर अमल करने से संबंधित कवायद जल्द शुरू की जायेगी।