पूर्वांचल में महिलाओं ने रखा वटसावित्री व्रत, अखंड सौभाग्य का मांगा वर, जानें क्या है इस व्रत का महात्म्य

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PATNA: शुक्रवार को पूर्वाचल में महिलाओं ने वटसावित्री व्रत रखा. जल, फूल, नैवेद्य आदि से वट वृक्ष की पूजा करके अखंड सौभाग्य का वर मांगा. आपको बता दें कि बिहार और यूपी में महिलाओं के बीच वटसावित्री के व्रत का बहुत महात्म्य है. इस दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखती हैं. महिला 16 श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा करती हैं और पति की लंबी आयु के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं.

क्या है इस व्रत का महात्म्य-

इस व्रत मान्यता है कि इस दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए. इसलिए महिलाओं के लिए ये व्रत बेहद ही फलदायी माना जाता है. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है. धार्मिक मान्यता अनुसार जो व्रती सच्चे मन से इस व्रत को करती हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ उनके पति को लंबी आयु प्राप्त होती है. कई जगह इस व्रत को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है.

वट सावित्री पूजन सामग्री:

पूजन के लिए माता सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, बरगद पेड़, लाल धागा, कलश, मिट्टी का दीपक, मौसमी फल, पूजा के लिए लाल कपड़े, सिंदूर-कुमकुम और रोली, चढ़ावे के लिए पकवान, अक्षत, हल्दी, सोलह श्रृंगार और पीतल का पात्र जल अभिषेक के लिए. वट वृक्ष की जड़ में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु व डालियों, पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है. महिलाएं इस दिन यम देवता की पूजा करती हैं.

वटसावित्री व्रत पूजा विधि-

इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा के साथ-साथ सत्यवान और यमराज की पूजा भी की जाती है. वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत करने का संकल्प लें. फिर सोलह श्रृंगार करें और सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें. फिर बांस की एक टोकरी में पूजा की सभी सामग्रियां रख वट वृक्ष के पास जाकर पूजा प्रारंभ करें। सबसे पहले पेड़ की जड़ को जल का अर्घ्य दें. फिर सोलह श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद वट देव की पूजा करें. वट-वृक्ष की पूजा हेतु जल, फूल, रोली-मौली, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ इत्यादि चढ़ाएं और जलाभिषेक करें. पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन बार परिक्रमा करें.

इसके बाद वट सावित्री व्रत की कथा सुननी चाहिए. कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने का बायना निकाले और उसपर कुछ रूपए रखकर अपनी सास को दें. जो स्त्रियाँ अपनी सासों से दूर रहती है, वे बायना उन्हें भेज दे और उनका आशीर्वाद लें. पूजा की समाप्ति के पश्चात ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि दान करें.