कभी रोहतास गढ़ के किला की दिवारों से टपकता था खून..

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पटना: बिहार के रोहतास जिला में स्तिथ रोहतास गढ़ का किला विश्व के प्राचीन व विशाल किलों में शुमार किया जाता है। आज रोहतास गढ़ किला अपने स्वर्णिम इतिहास की जगह उपेक्षा की दास्तां बयां करने को विवश है। वह इमारत ध्वस्त हो रही है, जहां के कण-कण में सैकड़ों वर्षों का इतिहास छिपा है।

रोहतास गढ़ का किला लगभग दो हजार फीट की उंचाई पर स्थित है। इस किले के बारे में कहा जाता है कि कभी इस किले की दीवारों से खून टपकता था। इस प्राचीन और मजबूत किले का निर्माण त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा त्रिशंकु के पौत्र व राजा सत्य हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने कराया था।

लोगों का मानना है कि वो राजा रोहिताश्व के आत्मा की आवाज थी। इस आवाज को सुनकर हर कोई डर जाता था। फ्रांसीसी इतिहासकार बुकानन ने लगभग दो सौ साल पहले रोहतास की यात्रा की थी, तब उन्होंने भी पत्थर से निकलने वाले खून की चर्चा एक दस्तावेज में की थी। उन्होंने कहा था कि इस किले की दीवारों से खून निकलता है।

बहुत दिनों तक यह किला हिन्दू राजाओं के अधिकार में रहा था, लेकिन 16वीं सदी में मुसलमानों के अधिकार में चला गया था और अनेक वर्षों तक उनके ही अधीन रहा था। बताया जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई (1857) के समय अमर सिंह ने यही से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का संचालन किया था।

रोहतास गढ़ का किला काफी भव्य है। किले का घेरा 28 मील तक फैला हुआ है। इसमें कुल 83 दरवाजे हैं, जिनमें मुख्य चारा घोड़ाघाट, राजघाट, कठौतिया घाट व मेढ़ा घाट है। प्रवेश द्वार पर निर्मित हाथी, दरवाजों के बुर्ज, दीवारों पर पेंटिंग अद्भुत है। रंगमहल, शीश महल, पंचमहल, खूंटा महल, आइना महल, रानी का झरोखा, मानसिंह की कचहरी आज भी मौजूद हैं। परिसर में अनेक इमारतें हैं जिनकी भव्यता देखी जा सकती है।