संजय जायसवाल ने कांग्रेस को घेरा, कहा- गरीबों की इतनी दुर्दशा करने के बाद भी नहीं भरा मन

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PATNA: प्रवासी मजूदरों के मसले पर कांग्रेस को घेरते हुए भाजपा प्रदेश डॉ. संजय जायसवाल ने कहा “ लंबे समय तक गरीबी हटाओ का भुलावा देकर कांग्रेस ने जिस तरह से गरीबों और मजदूरों का शोषण किया है, वह किसी से छिपा नहीं है. कांग्रेस की कारस्तानियों की वजह से ही राज्यों में पलायन बढ़ा और लोगों को अपना घर-बार छोड़ दूसरे राज्यों में जाने पर विवश होना पड़ा. लेकिन इन गरीबों की इतनी दुर्दशा करने के बाद भी आज तक कांग्रेस का मन नहीं भरा है.

उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां कांग्रेस के सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी संकट के समय में भी प्रवासी मजदूरों का दुख बांटने का सड़क पर ड्रामा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस शासित सरकार प्रवासी मजदूरों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुछ दिन पहले ऐलान किया था कि कांग्रेस अपने खर्चे पर प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजेगी लेकिन उनका यह ऐलान उनके पसंदीदा नारे ‘गरीबी हटाओ’ की ही तरह महज एक ऱाजनीतिक स्टंट बन कर रहा गया है.

उन्होंने कहा किसोनिया जी के ऐलान के बाद भी कांग्रेस शासित राज्यों से प्रवासी मजदूरों को ट्रकों में भेड़-बकरीयों की तरह ठूंस-ठूंसकर भेजा रहा है. महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से भारी संख्या में प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए राज्य सरकार द्वारा ट्रेनों की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है, जबकि केंद्र सरकार पहले ही कह चुके हैं कि प्रवासी मजदूरों को उनके राज्य भेजने के लिए रेलवे के पास रिजर्व ट्रेनें हैं और राज्य सरकारों द्वारा डिमांड करने पर यह ट्रेनें उन्हें मुहैया करायी जा रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि यूपी सरकार को 1000 बसें देने की पेशकश करने वाली कांग्रेस आखिर अपने शासित राज्यों में ट्रेनें क्यों नहीं चलवा रही हैं?”

डॉ.जायसवाल ने कहा कि बिहार में तो कांग्रेसी गठबंधन ने ओछी राजनीति की सभी सीमाएं पार कर दी है. इनके प्रमुख सहयोगी राजद की बात करें तो, लॉकडाउन की आपदा में जनसेवा से पूरी तरह नदारद रहे इनके नेता बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूरों पर डोरे डालने में जुट चुके हैं. नकारात्मक और स्वार्थपरक राजनीति की इससे बड़ी पराकाष्ठा क्या होगी कि इनके नेता उन गरीबों को भोजन देने की बजाए सदस्यता का फॉर्म बाँटने में व्यस्त हैं. इन दोनों दलों की राजनीति से एक बात तय है कि चाहे जनता इनकी कितनी भी फजीहत करे, यह दोनों दल सुधरने वाले नहीं हैं.