एग्रीमेंट कर किया यौन शोषण  

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वैशाली समाचार (से विकाश)  (Vaishali News) वैशाली जिला के गदाई सराय गांव के डॉक्टर द्वारा अपने ही पड़ोस की भोली-भाली लड़की से शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का मामला सामने आया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब शादी का एग्रीमेंट का कॉपी सामने आया ।

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एग्रीमेंट कॉपी पर एक साल तक शादी की बात सामने आई है। फिर तो लड़की के परिवार वालों का पैरों तले जमीन ही खिसक गई ! फिर क्या था, आनन-फानन में लड़की के परिजन लड़के के पास जमुई पहुंचे जंहा वह  सदर अस्पताल में  कार्यरत है। वंहा पहुंचने पर तो पूरा मामला ही खुल गया । इस विवाद के बाद पीड़िता नगमा परवीन ने महिला हेल्प लाइन, पुलिस और स्थानीय लोगों से मदद मांगी । जिसके बाद जमुई के सदर थाना ने डॉ. अरशद अली को हिरासत में ले लिया । यही नहीं पुलिस दवाब के एक दिन बाद अरशद अली ने नगमा खातून से थाने में निकाह भी कर लिया, जिसे बाद में प्रसनल मुस्लिम लॉ बोर्ड के तहत निकाह को रजिस्टर्ड कराया गया। मगर जिसके दिल में ही खोट हो वो लोगों को धोखा देने के नए-नए उपाय तो ढूंढ ही लेता है ।

तक़रीबन दो महीना प्यार मुहब्बत के साथ शौहर बीबी की तरह रहने के बाद डॉक्टर ने अपनी बीबी नगमा को यह समझाते हुए उसके मायके भेज दिया की अपनी बहन की शादी के बाद उसे अपने पास बुला लेगा लेकिन बुलाने की बजाए डॉक्टर ने फिर किसी दूसरी लड़की से शादी कर ली, जिसकी जानकारी मिलते ही पीड़ित नगमा खातून अपने मायके से महज 100 मीटर दूर हाजीपुर के गदाई सराय स्थित अपने ससुराल पहुंची लेकिन वंहा उसके साथ उसके ससुराल वालों ने काफी बत्तमीजी की।  जिसके बाद नगमा और उसके परिजन वैशाली डीएम और एसपी से संपर्क कर मामला सदर थाना हाजीपुर में दर्ज कराया ।

तब जाकर सदर थाना के सहयोग से आरोपी डॉ अरशद अली अब सलाखों के पीछे है लेकिन नगमा प्रवीण अपने साथ हुए धोखे से सदमे में है और डॉ. अरशद अली को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिय न्यायालय की ग़ुहार लगा रही है।दरअसल डॉ. अरशद अली और नगमा प्रवीण एक ही गांव के रहने वाले हैं। डॉक्टर अरशद अली जमुई सदर हॉस्पिटल में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर कार्यरत है। दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो लड़की शादी का दबाव देने लगी। तब डॉ. अरशद अली ने एक कोर्ट मैरेज का सर्टिफिकेट का झांसा देकर एक नोटरी पब्लिक का एक स्टाम्प पेपर तैयार किया जो अंग्रेजी में था जिसे पीड़ित और उसके परिजन उस कॉन्ट्रेक्ट को समझ नहीं पाए । कॉन्ट्रेक्ट में एक साल तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहने फिर बाद में दोनों के राजी होने के बाद ही पति-पत्नी के संबंध के रूप में रहने की बात कही गयी है। सम्बन्ध विच्छेद के बाद कोई भी चाहे वो लड़का हो या लड़की, कोई-पक्ष न्यायालय और पुलिस थाने में केस नहीं करेगा, ऐसा लिखा गया है । फिर बाद डॉक्टर नगमा को अपने साथ जमुई लेकर चला गया। जिसके बाद मामले की जानकारी होते ही जमुई  सदर थाना के सहयोग से थाना में ही दुबारा निकाह पढ़वाया गया जिसके गवाह तत्कालीन थाना अध्यक्ष संजीव कुमार और स्थानीय मुखिया बने । मामला अखबारों में भी प्रमुखता से छाया रहा । मामले को ठंढा होने के इंताजर करते हुए शातिर डॉक्टर ने नगमा को बदनामी के कारण बहन की शादी नहीं होने का बहाना बनाकर नगमा को दो माह बाद घर भेज दिया। बाद में अरशद अपनी पत्नी को बुलाने के नाम पर टाल-मटोल करने लगा। कुछ ही दिन बाद नगमा और उसके परिवार पर ससुराल वालों की तरफ से कोर्ट में फौजदारी मुक़दमे का नोटिस आया। तब जाकर नगमा और उसके परिजनों ने दहेज़ उत्पीडन का केश अपने पति और उसके परिवार पर सदर थाना हाजीपुर में  दर्ज कराया ।

नगमा को जब से अपने शादी को लेकर डॉ. अरशद  अली पर संदेह हुआ है तब से वह लगातार अपने ससुराल वालों की धमकी और प्रतारणा से प्रताड़ित हो रही है। नगमा अब अपने पति डॉ. अरशद से अपने शादी को लेकर अली की जालसाजी के कारण सदमे में है और न्याय की गुहार लगा रही। कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रही है। वहीं इस मामले में जब मीडिया आरोपी डॉक्टर के घर उनका पक्ष जानने के लिए गदाई सराय स्थित उसके घर पहुंची तब डॉक्टर के परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया, मीडियाकर्मियों से भी काफी बत्तमीजी से पेश आने लगे ।सभी मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने लगा।

हालांकि पुलिस ने दो दिन पूर्व हुए आरोपी डॉक्टर की दूसरी शादी के आरोप और दहेज़ प्रतारणा के मामले में कार्रवाई करते हुए अरशद अली को जेल भेज दिया है लेकिन पीड़िता को न्याय कैसे मिलेगा ? ये देखने वाली बात होगी। इस पुरे मामले पर कानून विद वैशाली के लोक अभियोजक (पीपी) ने आश्चर्य जताते हुए पहले तो यह कहा की भारत में एक साल के कॉन्ट्रेक्ट मैरेज का किसी भी धर्म में कोई प्रावधान नहीं है, साथ ही यह भी बताया की ऐसे किसी भी कॉन्ट्रेक्ट को बनाने में शामिल नोटरी पब्लिक, वकील और बनवाने वाले सभी दोषी माने जायेंगे। जांच में संलिप्त पाये जाने पर  इस तरह के सभी मामलों पर कानूनी कार्यवाई के तहत 3 से 10 साल तक की सजा भी हो सकती है ।