बिहार में बन रहा है विद्यालय में जल एवं स्वच्छता के लिए बेंचमार्किंग सिस्टम

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पटना – पटना में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् और यूनिसेफ के द्वारा, विभावरी के सहयोग से विद्यालय में जल एवं स्वच्छता के लिए बेंचमार्किंग सिस्टम विषय पर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का शुभारंभ बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् के राज्य परियोजना निदेशक, संजय सिंह, ने यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असदुर रहमान, यूनिसेफ दिल्ली की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ प्रतिभा सिंह, यूनिसेफ बिहार से शिक्षा विशेषज्ञ, प्रमिला मनोहरण, जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ प्रभाकर सिन्हा , जल एवं स्वच्छता, पदाधिकारी सुधाकर रेड्डी और भोला प्रसाद सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बिहार शिखा परियोजना परिषद् की उपस्थिति में दीप जला कर किया गया.

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् के राज्य परियोजना निदेशक, संजय सिंह ने कहा कि सफाई का सीधा असर विद्यालय के आउटलुक पर, बच्चों के स्वास्थ्य और उनके पढ़ने और सीखने के स्तर पर पड़ता है. आंकड़ों के महत्व के बारे में बताते हुए सिंह ने कहा कि अगर आंकड़े सही नहीं होंगे तो हम सही पालिसी नहीं बना पाएंगे. विद्यालय के देखरेख और प्रबंधन के लिए राशि में वृद्धि की गई है. कम से कम 10 प्रतिशत राशि का प्रयोग विद्यालय में जल एवं स्वच्छता के लिए खर्च करना है. अगर कोई विद्यालय ऐसा है जहाँ जल एवं स्वच्छता सम्बंधित आधारभूत संरचना की कमी है तो उसको विभाग तुरंत राशि उपलब्ध करवाएगा .

उन्होंने आह्वान किया आप सभी अपने अपने जिलों में कुछ ऐसे स्कूल विकसित करें जो दूसरों के लिए मिसाल हो. इस वर्ष हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार में हमारे नामांकन कम से कम पिछले साल की तुलना में दो गुना हो और हमारे विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ भारत पुरस्कार जीत पाएं. आज के हमारे इस राज स्तरीय कार्यशाला में हम स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के 5 विषयों पानी, शौचालय, साबुन से हाथ धोना, ऑपरेशन और रखरखाव, व्यवहार परिवर्तन और क्षमता निर्माण के सभी 39 संकेतकों पर बिहार के सन्दर्भ में चर्चा और विश्लेषण करेंगे ताकि इसके आधार पर जल एवं स्वच्छता के लिए एक स्टैण्डर्ड सिस्टम होगा जिसके आधार पर विद्यालयों में जल एवं स्वच्छता का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे.

यूनिसेफ बिहार, प्रमुख, असदुर रहमान ने कहा कि यूनिसेफ, स्कूलों में जल स्वच्छता सुविधाओं में सुधार कर स्कूलों को बच्चे के अनुकूल बनाने की इस पहल में सहयोग कर रहा है . राष्ट्रीय बेंचमार्किंग प्रणाली को बिहार के सन्दर्भ में प्रासंगिक बनाना आवश्यक है ताकि राज्य इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी कर सके और सुनिश्चित कर सके कि सभी स्कूल चरणबद्ध तरीके से WASH के मानकों को पूरा कर सकें । यूनिसेफ बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् को सभी विद्यालयों में जल एवं स्वच्छता का बेहतर प्रबंधन करने के लिए राज्य के सन्दर्भ में एक मानक विकसित करने में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है .

यूनिसेफ दिल्ली की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ प्रतिभा सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते के अनुच्छेद 24 के अनुसार हर बच्चे को बिना किसी भेद भाव के स्वच्छ पीने का पानी, शौचालय और स्वच्छ वातावरण का अधिकार है और इसको सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है. सतत विकास लक्ष्य के गोल 4 और 6 में भी सभी के लिए शौचालय और साफ़ पीने के पानी की बात की गई है. दूसरे राज्यों के बेहतर कार्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि झारखण्ड और राजस्थान के स्कूल में जल और स्वच्छता के लिए योजना निर्माण, क्षमतावर्धन और अनुश्रवन के लिए राज्यस्तर पर समिति का निर्माण किया गया है वही बिहार और राजस्थान में जल और स्वछता की विषय को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है.

यूनिसेफ, बिहार के जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ, प्रभाकर सिन्हा ने कहा कि यूनिसेफ के साथ मिलकर BEPC ने बिहार के संदर्भ में राष्ट्रीय दिशानिर्देशों की समीक्षा करके बिहार के स्कूलों के लिए एक बेंचमार्किंग सिस्टम विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। भारत सरकार के स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार में जो 39 मापदंड है उनसे से कुछ बिहार के सन्दर्भ में बहुत उपयुक्त नहीं थे. जैसे राष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार हर विद्यालय में पीने के पानी के लिए आरओ होना चाहिए लेकिन बिहार के सन्दर्भ में यह बहुत उपर्युक्त नहीं हैं. इसी प्रकार अन्य भी कुछ मापदंड हैं जो बिहार के सन्दर्भ में बहुत उपयोगी नहीं हैं, इस कार्यशाला में उन पर चर्चा हुई.

जल एवं स्वच्छता पदाधिकारी, यूनिसेफ, दिल्ली, कौशिकी बनर्जी ने स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार (एसवीपी) के घटकों और इसके संबंधित अंकों पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने एसवीपी संकेतकों में अधिक अंक प्राप्त करने के लिए एक स्कूल को अपने संसाधनों को कैसे खर्च करना चाहिए, इसके बारे में भी बताया।

कार्यशाला को 5 तकनीकी सत्रों में बांटा गया था जैसे बिहार के संदर्भ में स्कूलों में जल और स्वच्छता और राज्य बेंचमार्किंग प्रणाली की आवश्यकता, राष्ट्रीय स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार संकेतकों की महत्वपूर्ण समीक्षा, इसके क्रियान्यवन और निगरानी तंत्र, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार का सत्यापन. तकनीकी सत्र के बाद मौजूदा राष्ट्रीय स्वच्छ पुरस्कार दिशानिर्देशों की समीक्षा के लिए सभी प्रतिभागियों को जल, शौचालय, साबुन से हाँथ धुलाई, रख रखाव और क्षमतावर्धन एवं व्यवहार परिवर्तन इत्यादि मुद्दों पर बाँट कर समूह कार्य करवाया गया .

कार्यशाला में सभी 38 जिलों के समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के जिला कार्यक्रम अधिकारी और शिक्षा विभाग के सहायक अभियंताओं ने इस कार्यशाला में भाग लिया और एक मजबूत बेंचमार्किंग प्रणाली विकसित करने के लिए मंथन किया। कार्यक्रम का सञ्चालन राज्य कार्यक्रम अधिकारी, बीईपीसी भोला प्रसाद सिंह ने की।