लैब टेक्नीशियन का आक्रोश मार्च

107
0
SHARE

सुपौल – सरकारी गैर सरकारी लैब टेकनीशियन की शुरु हुई हड़ताल की वजह से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है। सरकार के निर्णय के विरोध में जिले के पैथोलॉजी में काम करने वाले सभी लैब टेक्नीशियन एक सप्ताह यानि 13 सितंबर तक हड़ताल पर रहेंगे। ऑल इंडिया लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के आह्वान पर सदर अस्पताल गेट पर जारी हड़ताल में शुक्रवार को कर्मीयो ने सरकार विरोधी नारे लगाये और सरकार की इस नीति को दमनकारी नीति करार दिया।

इस दौरान कोशी कमिश्नरी के तमाम लैब टेक्नीशियन ने आक्रोश मार्च निकाल कर अपनी नराजगी का इजहार किया आक्रोश मार्च सदर अस्पताल से निकल कर गांधी मैदान होते हुए लोहिया चौक से पुनः सदर अस्पताल में समाप्त हुआ इस दौरान सरकार के विरोध मे हाथों में तख्ती लिये नारेबाजी भी की। हङताल कर रहे टेकनीशियनो का कहना है कि एक तरफ सरकार इन्हीं लोगों से अस्पताल में काम कराती है और जो लोग बाहर काम करते हैं उसे बंद करा रही है। सरकार की दोहरी नीति के विरोध मे लैब टेक्नीशियन ने कहा कि सरकार एक तरफ ग्रामीण चिकित्सकों को ट्रेनिंग करा रहा है ताकि उसे रोजगार दिया जा सके कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के लिये प्रेरित किया जा रहा है। वहीं लैब टेक्नीशियन को जो रोजगार कर रहे हैं उसे बेरोजगार बना रहे हैं।

बता दें कि सरकार के पास 2200 अस्पतालओ में महज 36 एमडी पैथोलाँजिस्ट है। जिसके बदौलत बिहार की स्वास्थ जांच व्यवस्था नहीं चल सकती है। इसी मांग को लेकर संघ ने कल से बिहार सरकार से लैब टेक्नीशियन संवर्ग के गठन करने की मांग को लेकर हङताल पर चले गये। जो 13 सितंबर तक जारी रहेगी। लैब टेकनीशियनो का कहना है कि सरकार के पुराने गजट के हिसाब से लैब टेकनीशियन को तीन श्रेणी में बांटा गया है बेसिक, मीडियम और एडवांस जिसे लगभग सभी राज्यों की केबिनेट ने पास कर दिया है। इधर बिहार में इसे अनुमोदित ही नहीं किया गया। लेकिन अन्य राज्यों की तरह यहां के टेकनीशियन बेसिक लैब टेकनीशियन की श्रेणी में आते हैं। इस वजह से इनकी जांच को वैध करार दिया जाय। हड़ताल पर बैठे टेकनीशियनो का कहना था कि जब तक उनकी मांग पुरी नही होगी तब तक आन्दोलन जारी रहेगा।