विभागीय मिली भगत से लाखों की राजस्व को क्षति

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सुपौल – जिला समाहरणालय परिसर में लगी दर्जनों सरकारी विभाग की गाड़ी, सभी गाड़ियों में बड़े-बड़े अक्षरों से विभाग एवं पदाधिकारी का पद लिखा हुआ है। लेकिन एक भी गाड़ी में व्यवसायिक नंबर प्लेट नही है। जबकि निजी गाड़ी में व्यवसायिक नंबर प्लेट लगाना जरूरी है, वहीं सारे वाहन में निजी नम्बर प्लेट लगे हुये है। जब जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग के नाक के नीचे ऐसे गैर कानूनी कार्य होंगें, तो जवाबदेह कौन, यहाँ तक कि जब सरकारी अधिकारी ही ऐसे गैर कानूनी कार्य करेंगे तो कार्रवाई कौन करेगा?

दरसअल इस मामले में विभाग को व्यवसायिक वाहन एवं चालक रखने में ज्यादा शुल्क विभाग को चुकाना पड़ेगा, वहीं निजी वाहन के इस्तेमाल करने पर विभाग को कम शुल्क चुकाना पड़ता है। आखिर इस तिकड़म से हो रहे लाखों के सरकारी राजस्व की क्षति के लिये जवाबदेह कौन और तौ और जानकारी के अनुसार कई पदाधिकारी खुद की निजी वाहन का उपयोग सरकारी कार्य (यानि खुद ) के लिए सरकारी राशि हड़प रहे हैं, आखिर इस पर किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ती?