सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं में भी सुशील मोदी फरेब ढूंढने की कर रहे हैं असफल कोशिश- मनोज झा

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भ्रष्टाचार के आरोप पर लगातार फंसता जा रहा राजद कुनबा मानों राजनीति छोड़ अभी तक सिर्फ प्रोपटी डीलर्स का ही काम किया है। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने एक के बाद एक आरोपों की झड़ी लगा रखी है और राजद परिवार उसका खंडन करने में लगा है। इसी सिलसिले में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा की सुशील कुमार मोदी का बार-बार प्रेस कांफ्रेंस इस बात का दस्तावेजी सबूत है कि जब किसी व्यक्ति का राजनितिक चिंतन दिवालियेपन की हदें पार कर जाता है तो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं में भी वह फरेब ढूंढने की असफल कोशिश करता है।

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अपने दल में तमाम राजनितिक हैसियत खो चुके मोदी एक बार फिर से झूठ और अफवाह को ढाल बनाकर 2018 में विधानपार्षद की सदस्यता येन-केन प्रकारेण हासिल करना चाहते हैं। पूरा बिहार जानता है कि आसियाना होम्स लिमिटेड और आसियाना लैंडक्रॉफ्ट रियलटी लिमिटेड के खोखा कंपनियों के बारे में हमने विस्तार से बातें रखते हुए यह कहा था कि सम्बद्ध एजेंसी से एक निष्पक्ष जांच की ज़द में सुशील मोदी स्वाभाविक रूप से आ जायेंगे। हजारों करोड़ों रूपये की मनी लौंडरिंग की हमने सिर्फ दो शुरूआती मिसाल दी थी लेकिन मोदी उस पर आपराधिक चुप्पी साधे बैठे हैं। दोनों ही कंपनियों और इनकी मकड़जाल की करतूतें कोलकाता की तंग गली के एक खास पते से चलती है और इस पते का सुशील मोदी को पूरा पता है। मनोज झा ने कहा कि हम आज भी इस बात को फिर से डंके की चोट पर कहते हैं कि सुशील मोदी की राजनीति का उठान और इन कंपनियों के बढ़ते कारोबार के बीच सीधा और नैसर्गिक रिश्ता है।

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क्विड प्रो क्रो या एवजी राजनीति का संभवतः सुशील मोदी से पुराना रिश्ता है, इसलिए स्वाभाविक और सार्वजनिक जानकारियों में अपनी राजनीति की तरह ‘एवज़’ के तत्त्व सूंघने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज झा ने बताया कि उपलब्ध प्रक्रियाओं के नियम्वार पालन करने के बावजूद भी सुशील मोदी को परेशानी सिर्फ इस बात से है कि सामजिक न्याय के दलित-पिछड़ा विमर्श ने उन जैसे अभिजात्य राजनीति के ध्वज वाहकों को हाशिये पर ला दिया है। सन नब्बे के जिस सामाजिक न्याय की लहर ने जूता सिलने वाले, पत्थर तोड़ने वाली, खेत-खालिहानों में काम करने वालों को सत्ता प्रतिष्ठान में भागीदार बना दिया वो सुशील मोदी जैसे नेता को अभी तक हज़म नहीं हो रहा है। सुशील मोदी जैसे प्रतिगामी और सामंती राजनितिक सोच वाले लोग जब कभी सामजिक न्याय के मंथन से राजनितिक लड़ाई हारते हैं तो पूरी कोशिश होती है कि दलित-पिछड़ा नेतृत्व की छवि पर चोट की जाए। जिस व्यक्ति को बार-बार कहना पड़े कि वो फूल टाईम पोलटिक्स करता है, इससे चोर की दाढ़ी में तिनका वाली बात चरितार्थ होती है। इससे यह भी ज़ाहिर होता है है उनके बाकी कारोबार किसी बड़े शहर की छोटी गलियों से चलते हैं। मोदी का तर्क उनके द्वारा ही कही गयी बातों का खंडन करता है। मोदी सुबह कुछ, दोपहर कुछ और शाम को कुछ और बड़बड़ाते हैं। तर्क की अगर बात करें तो मोदी खुद बताये की जब वो उपमुख्यमंत्री बने थे तब उन्होने आडवानी को कितने करोड़ रूपए दिए थे ? जैसा की पूरी बीजेपी मानती है बिहार में बीजेपी की हार के सबसे बड़े खलनायक है सुशील मोदी ही रहे हैं क्योंकि उन्होने टिकट बीजेपी कार्यकर्ताओं को नहीं बल्कि भारी भरकम थैली सौंपने वालों को थमा दी थी और उन्हीं थैलियों का परिणाम है आज देश में सुशील मोदी के भाई राजकुमार मोदी की आशियाना होम्स जैसी एक ही पते पर सैंकड़ों खोखा कम्पनी है जिनका वो जिक्र भी नहीं करना चाहते। उन्ही के अनेकों सांसद विधानसभा चुनाव में आरोप लगा रहे थे बीजेपी का एक-एक टिकट पांच-पांच करोड़ में बिक रहा है। उसका जवाब आजतक मोदी ने नहीं दिया ? मनोज झा ने सवालिया लहजे में पूछा कि क्यों साहब, उन परदे के पीछे के अफसानों का भी खुलासा कर देते तो बेहतर होता ?