राष्ट्रीय विमर्श से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह देश एवं दुनिया के लिये काफी लाभदायक होगा: मुख्यमंत्री

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पटना समाचार, 10 अप्रैल 2017: (Patna News) मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के अवसर पर ज्ञान भवन पटना में आयोजित राष्ट्रीय विमर्श का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय विमर्श में आये अन्य विशिष्ट अतिथियों ने गांधी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

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राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के चम्पारण सत्याग्रह का सौ वर्ष पूरा हुआ है। आज ही के दिन 1917 में गांधी जी पटना पधारे थे। वे पटना से मुजफ्फरपुर गये थे। वहां पर कुछ दिन ठहरे थे, इसके पश्चात वे मोतिहारी गये थे। वहां जो कुछ भी हुआ है, उससे आप सभी अवगत हैं। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह से आप सभी अवगत हैं। राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी को आमंत्रित किया था। गांधी जी ने उनका आमंत्रण स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि गांधी जी सबसे पहले पूरी स्थिति को खुद देखना चाहते थे, तभी कुछ कहना चाहते थे। चम्पारण सत्याग्रह ने जो रूप धारण किया, इससे ना सिर्फ इस क्षेत्र में हो रहे किसानों पर अत्याचार समाप्त हुआ बल्कि इससे पूरे देश में संदेश पहुंचा। चम्पारण सत्याग्रह के बाद आजादी की लड़ाई ने एक जबर्दस्त रूप धारण किया। 1917 के तीस साल के अंदर देश आजाद हो गया। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह का पूरे आजादी के इतिहास में विशिष्ट योगदान है। आज चम्पारण सत्याग्रह के सौंवे साल में हम सभी यहां एकत्रित हुये हैं, यह हम सबके लिये गौरव की बात है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश एवं दुनिया में असहिष्णुता का माहौल है, टकराव का माहौल है। भौतिकतावादी चीजें लोगों के दिल एवं दिमाग पर हावी है। इस माहौल में गांधी जी के विचारों के लोग एक जगह हों और सार्थक विचार करें तो इस विमर्श से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह देश एवं दुनिया के लिये काफी लाभदायक होगा। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा समाज को जोड़ने की कोशिश की है। राज्य की जो भी नीतियां बनायी गयी है, उनमें प्रारंभ से इस बात का ख्याल रखा गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे। हमारी योजनायें सभी के लिये है। सभी को इससे लाभ मिला है। चाहे वह बालिका पोशाक योजना, बालिका साइकिल योजना, बालक साइकिल योजना आदि हो। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने जो कुछ कहा है, मैं उस पर अमल करने की कोशिश करता हूं। मेरा मार्गदर्शक सिद्धांत गांधी जी का सिद्धांत ही रहा है। हमने शुरू से न्याय के साथ विकास पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी तबके के लोगों की भलाई के लिये कार्य किया गया है। नारी सशक्तिकरण की दिशा में भी काफी काम हुआ है। इसका लाभ भी दिखाई पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बिहार में एक बहुत बड़ा कार्य हुआ है। समाज में एक बहुत बड़ी बुराई व्याप्त थी शराब के सेवन की। इससे पूरा समाज बर्बाद हो रहा था। मैं छात्र जीवन से ही शराब के खिलाफ था परंतु शराबबंदी को लेकर मेरे मन में द्वंद रहता था। शुरू से ही शराबबंदी को बढ़ावा देने के लिये मद्य निषेध दिवस का आयोजन किया जाता था। शराबबंदी अपनाने पर गांवों को पुरस्कृत किया जाता था। शराबबंदी से जुड़ी अच्छी पेंटिंग बनाने पर युवाओं को पुरस्कृत किया जाता था। शराब की दुकानों की संख्या भी घटाई गयी परंतु इसके बाद भी शराब का उपयोग बढ़ता ही जा रहा था।

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उन्होंने कहा कि महिलाओं के एक सम्मेलन में मैं जैसे ही अपना भाषण समाप्त कर बैठा ही था कि पीछे से महिलाओं ने आवाज दी कि शराबबंदी कीजिये। उसी वक्त मेरे मन का सारा द्वंद समाप्त हो गया। मैंने पुनः माइक पर आकर कहा कि अगली बार सत्ता में आऊंगा तो शराबबंदी लागू करूंगा। आपने पुनः काम करने का मौका दिया। सरकार बनने के बाद मैंने पहला एलान किया कि 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू करूंगा। पहले शराबबंदी चरणबद्ध तरीके से लागू करने को सोचा था। लोगों के बीच शराबबंदी के लिये माहौल बनाने के लिये जबर्दस्त जन जागरण का अभियान चलाया गया। छात्र-छात्राओं ने अपने अभिभावकों से शराब नहीं पीने का संकल्प पत्र भरवाया। एक करोड़ 19 लाख संकल्प पत्र भरे गये। नौ लाख जगहों पर नारे लिखे गये। 25 हजार जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। गीत बनाये गये एवं गाये गये। एक जबर्दस्त माहौल बना। शहरों में जब शराब की दुकानें खुलने लगी तो लोगों द्वारा उसका विरोध किया जाने लगा। मुझे बहुत खुशी हुयी। माहौल ऐसा बना कि चार दिनों के अंदर 5 अप्रैल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गयी। पूरे बिहार के लोगों द्वारा इसका स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी सफलतापूर्वक लागू रखने के लिये जन चेतना जरूरी है। इसे देखते हुये दो महीने का एक जन जागरूकता अभियान चलाया गया। शराबबंदी से आगे बढ़कर नशामुक्ति की ओर के लिये अभियान चलाया गया। अभियान के क्रम में मानव श्रृंखला बनाया गया। हमें पहले उम्मीद थी कि मानव श्रृंखला में दो करोड़ लोग शामिल होंगे परंतु इसमें चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। यह जनभावना का नशामुक्ति के पक्ष में प्रकटीकरण है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद लोगों के माली हालत में सुधार आया है। लोगों का जो पैसा बच रहा है, उसको वे खान-पान, कपड़ों पर खर्च कर रहे हैं। आज समाज में शांति का माहौल है। शराबबंदी से अपराध में भी कमी आयी है। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार से प्रेरित होकर सोचा कि गांधी जी के चम्पारण सत्याग्रह के सौंवे साल से बढ़िया, शराबबंदी लागू करने के लिये, क्या समय होगा। साथ ही यह साल गुरू गोविंद सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाश पर्व का भी है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के साथ-साथ समाज की अन्य बुराइयों के खिलाफ भी अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमने लोक संवाद की शुरूआत की है, इसमें हम लोगों से सुझाव मांगते हैं। साथ ही लोगों की शिकायतों के निवारण के लिये लोक शिकायत निवारण कानून लागू किया गया है। अब तक एक लाख 25 हजार शिकायतों का निष्पादन किया जा चुके है। इसे भी मैंने 2 अक्टूबर से लागू किया था। उन्होंने कहा कि लोक संवाद में महिलाओं द्वारा दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के संदर्भ में सुझाव दिया गया। वर्तमान में दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के मामले बढ़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति के साथ-साथ दहेज प्रथा एवं बाल विवाह पर भी अभियान चलाया जायेगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी जहां-जहां गये थे, उन जगहों पर स्मृति यात्रा का आयोजन होगा। 17 अप्रैल 2017 को पटना में देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को हम सम्मानित करने जा रहे हैं। इस आयोजन में भाग लेने के लिये राष्ट्रपति एवं केन्द्रीय गृह मंत्री ने अपनी सहमति दे दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि चत्पारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह में हमारा मुख्य उद्देश्य है गांधी जी के विचारों से सबको अवगत कराना। उन्होंने कहा कि गांधी जी को सब मानते हैं, पर गांधी जी के विचारों को अपनाने के लिये कोई नजरिया नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बापू के विचारों पर घर-घर दस्तक देंगे। गांधी जी के विचारों पर फिल्म बनाकर भी एक-एक गांव, सौ तक के बसावट वाले टोलों तक दिखायेंगे। साथ ही स्कूल में बच्चों को रोज गांधी जी से जुड़ी कहानी प्रार्थना के बाद बताया जायेगा ताकि वे गांधी जी के विचारों से अवगत हो। उन्होंने कहा कि हम गांधी जी के विचारों को घर-घर तक पहुंचायेंगे। हर छात्र-छात्रा को इससे अवगत करायेंगे। अगर नई पीढ़ी का दस प्रतिशत भी गांधी जी के विचारों के प्रति आकर्षित हो जाय तो आने वाले 10 से 15 साल में समाज बदल जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राष्ट्रीय विमर्श में आज के संदर्भ में क्या करना चाहिये, इस पर विचार हो। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार के सभी पहलुओं पर विमर्श होना चाहिये। पर्यावरण पर भी जोर दिया जाय। आप गंगा नदी के किनारे हैं, गंगा नदी का हाल देख लें कि आज गंगा का क्या हाल है। उन्होंने कहा कि सभी विषयों पर जोर देना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज जहां हम उपस्थित हैं, यह सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र है और उसी में विज्ञान भवन की तरह ज्ञान भवन बना है। उन्होंने कहा कि हमने शुरू में ही कहा था कि ज्ञान भवन का कोई उद्घाटन कार्यक्रम नहीं होगा। राष्ट्रीय विमर्श से ही इसका उद्घाटन होगा क्योंकि ज्ञान का मतलब है, विचारों को धरती पर उतारना। शराबबंदी के संदर्भ में राजस्थान का उदाहरण देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि एन0एच0 एवं एस0एच0 के पांच सौ मीटर की दूरी के अंदर शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकती है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि कुछ राज्यों में एन0एच0 और एस0एच0 को डिनोटिफाइड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से सरकार को कोई नुकसान नहीं है। बिहार ने हिम्मत किया है, आप भी करके देखें। उन्होंने कहा कि एक बार फिर से हम गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचायेंगे ताकि लोगों का विचार बदले। इस दौर में इस तरह का राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है। इससे जो नतीजा निकलेगा, उन नतीजों को हमलोग पुस्तक की शक्ल में प्रकाशित करेंगे। नतीजों से लोगों को अवगत करायेंगे। आप एजेंडा सेट करें कि देश को कैसे आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रतिक्रिया व्यक्त करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि आप लोगों को यह बतायें कि आपको क्या विकल्प नजर आता है। लोगों के सामने सारी चीजें रख दें। उन्होंने कहा कि इस विमर्श का जो भी नतीजा निकलेगा, वह बहुत सार्थक होगा और देश के लिये उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि गांधी के नाम में कितना दम है कि सभी इसका लाभ उठाना चाहेंगे। वे लोग जो गांधी जी के विचारधारा के प्रतिकूल हैं, वे भी यात्रा निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आपलोग इस राष्ट्रीय विमर्श के बाद जो भी कार्यक्रम कीजियेगा, वह वर्तमान के इस भौतिकतावाद से छुटकारा दिलाने का राह तय करेगा। आप लोग जो भी यहां विमर्श करेंगे और उससे जो बात निकलकर आयेगी, उसका अनुपालन करने की कोशिश करूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है कि आप सभी यहां उपस्थित हैं। दो दिन का यह राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम सार्वजनिक जीवन में बदलाव लायेगा।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर धर्माधिकारी, श्री गोपाल कृष्ण गांधी, डाॅ0 रजी अहमद, सुश्री मेधा पाटेकर, श्री सच्चिदानंद सिंह, न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, सुश्री प्रेरणा देसाई ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में डाॅ0 एस0एन0 सुब्बाराव द्वारा एक गीत प्रस्तुत किया गया। आयोजित राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम में सभी विशिष्ट अतिथियों का शिक्षा मंत्री श्री अशोक चौधरी द्वारा पुष्प-गुच्छ, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न देकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, सहकारिता मंत्री श्री आलोक कुमार मेहता, कला, संस्कृति मंत्री श्री शिवचन्द्र राम, विधायकगण, विधान पार्षदगण, मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव शिक्षा श्री आर0के0 महाजन, प्रधान सचिव भवन निर्माण श्री अमृत लाल मीणा, प्रधान सचिव नगर विकास एवं आवास श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीष चन्द्रा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।