बीएचयू के कुलपति को मानद उपाधि देने पर हुआ विवाद

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पटना: राजधानी पटना राजधानी पटना के एसकेएम हॉल में गुरुवार को पटना विश्वविद्यालय का दो महीने में दूसरी बार कन्वोकेशन हुआ। कार्यक्रम पूरी तरह पारंपरिक रहा। इस समारोह में बीएचयू के कुलपति को मानद उपाधि देने के मामले में विवाद शुरू हो गया है। बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि विवि के एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट के एप्रूवल के बिना ही दिया गया।

जब एकाएक दीक्षांत समारोह में बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि देने की घोषणा की गई, तो हॉल में बैठे सिनेट, सिंडिकेट और एकेडमिक काउंसिल के सभी सदस्य अवाक रह गए। हॉल में ही सदस्यों के बीच इस पर चर्चा होने लगी कि आखिर किस आधार पर बीएचयू के कुलपति को मानद उपाधि दी गई।

जबकि विवि के नियमों के अनुसार, मानद उपाधि देने के लिए एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट का एप्रूवल होना आवश्यक है। लेकिन कुलपति ने अपनी मनमानी करते हुए बीएचयू के कुलपति को मानद उपाधि दे दी। इसकी जानकारी कुलाधिपति सह राज्यपाल रामनाथ कोविंद को भी नहीं दी गयी।

इसके पहले भी पटना विवि के पूर्व कुलपति केके झा के समय राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को मानद उपाधि देने की बात हुई थी। एकेडमिक काउंसिल से इसे एप्रूवल भी दिया गया था। लेकिन सिंडिकेट में इसका विरोध होने के कारण इसे एप्रूवल नहीं दिया गया। हालांकि कुछ दबाव होने की वजह से इसे चांसलर को भेज दिया गया। चांसलर ने इस फैसले को रद्द कर दिया। इस कारण से लालू प्रसाद को मानद उपाधि नहीं दी गयी।

2002 में तत्कालीन विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा को पटना विश्वविद्यालय ने मानद उपाधि दी थी। साथ ही इग्नू के वीसी एचपी दीक्षित को भी पीएचडी की मानद उपाधि दी गयी थी।

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