पर्वत-पुरुष दशरथ माँझी

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सुप्रिया सिन्हा –

गया – अचानक! उनकी आँखों में आँसू थम गए. धीरे-धीरे दिल की वेदना हर्ष में बदलने लगी. क्या हुआ उनकी पत्नी नहीं रही, गाँव की बहू-बेटियों को तो अब वे कष्ट नहीं झेलने होंगे. पिछड़े क्षेत्र के लोगों को अब 80 कि.मी. की दूरी तय करने से राहत मिलेगी. यह सच है कि पत्नी के चेहरे पर छायी पीड़ा से विचलित होकर ही उन्होंने यह संकल्प लिया था, लेकिन पूरे गाँव और भूभाग के लोगों की परेशानी दिन-रात देखते-देखते उनका मन तो पहले से ही उद्वेलित हो रहा था.

दशरथ माँझी का सफ़र उनकी पत्नी का जिक्र किए बिना अधूरा है. गहलौर और अस्पताल के बीच खड़े जिद्दी पहाड़ की वजह से उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी को वक्त पर इलाज नहीं मिल सका और वे इस दुनिया से चल बसीं. यहीं से शुरू हुआ माँझी का संकल्प भरा कठिन सफर.

वह उठकर लौट चले अपने सपनों के मंजिल से उस ओर जहाँ से उन्होंने संकल्प का शुरुआत किया था. कटे पत्थरों से बने उस ऊबड़-खाबड़ मार्ग पर चलते हुए उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं था. बिहार राज्य के गया जिला के गहलौर गाँव निवासी दशरथ माँझी में कबीर की साधना की शक्ति थी. जिस प्रकार संत कबीर अनपढ़ होते हुए भी अभी तक अपनी वाणी से संसार को प्रेरित करते रहे हैं, उसी प्रकार माँझी भी अनपढ़ रहकर समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए मन में घोर लालसा के साथ प्रेरणादायक हैं.

लगातार 22 वर्षों तक अथक श्रम करते हुए उन्होंने पहाड़ के पत्थर पर विजय प्राप्त की. अपने संकल्प पथ पर अडिग होकर उन्होंने 360 फीट की आसान राह बना दी. उस क्षेत्र के कठिन चढ़ाई और ढलाई के पहाड़ की छाती को चीरता हुआ माँझी ने 80 कि.मी. की सुदूर राह को 360 फीट में समेट दिया.

परन्तु एक अफसोस था…काश! उनके उस विजय दिवस पर उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी जीवित होती! कितनी हर्षित होती संकल्प पुरुष की वह नारी; जिसने कठिन श्रम के बाद भी अपने पति के लिए पानी नहीं ला पायी थी.

आज माँझी जैसे व्यक्ति के समाज उत्थान की भावना को उत्साहित करने की जरुरत है. यह एक गौरवपूर्ण बात है कि जिलाधिकारी गया ने माँझी को जिला का ‘सर्वश्रेष्ठ परिश्रमी’ व्यक्ति की उपाधि से विभूषित किया था. इस महान कार्य के लिए दशरथ माँझी को ‘राष्ट्रपति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था.

इतना ही नहीं, 2012 में निर्देशक केतन मेहता ने दशरथ माँझी के जीवन पर आधारित फिल्म माँझी: द माउंटेन मैन बनाने की घोषणा की. साल 2015 को फिल्म को रिलीज किया गया. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने माँझी और राधिका आप्टे ने फाल्गुनी देवी की भूमिका निभाई. आज इस संकल्प पुरुष का व्यक्तित्व हमारे लिए बेहद प्रेरणादायक है, भले ही वे सदा के लिए चिरनिद्रा में सो चुके हों. साल 2007 में पित्ताशय के कैंसर से पीड़ित माँझी का एम्स (नई दिल्ली) में निधन हो गया.