भारत छोड़ो आंदोलन और बिहार

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अंग्रेजों की क्रूर दमन नीति के कारण राष्ट्रीय भावना उग्रतर होती गई. सारे हिन्दुस्तानियों की नसों में क्रान्ति का रक्त दौड़ उठा. 7 अगस्त, 1942 को कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का प्रस्ताव पारित किया गया और कांग्रेस द्वारा अंग्रेजों से भारत छोड़ देने की मांग की गई. “भारत छोड़ो” आंदोलन की घोषणा से बिहार का जनमानस आंदोलित हो उठा. आंदोलन में अन्य प्रान्तों की अपेक्षा बिहार का योगदान अभूतपूर्व एवं सर्वोपरि रहा. सभी वर्गों के लोगों ने इस आंदोलन में समान उत्साह से भाग लिया.

31 जुलाई, 1942 को डॉ.राजेन्द्र प्रसाद को गिरफ्तार करने के लिए जिलाधिकारी ने तैयार रहने को कहा. अपने प्रिय नेता की गिरफ्तारी की खबर सुनकर अनेक लोग सदाकत आश्रम में एकत्र हो गए. ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’, ‘गांधी जी की जय’, ‘राजेन्द्र बाबू की जय’ का नारा लगाते हुए ये लोग बांकीपुर जेल तक गए. उसी समय फूलन प्रसाद वर्मा, मथुरा प्रसाद, अनुग्रह नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया. सरकार ने बिहार गजट का एक असाधारण अंक प्रकाशित कर बिहार कांग्रेस कमिटी तथा इसकी सहयोगी संस्थाओं को गैर कानूनी घोषित कर दिया. बिहार प्रांतीय कांग्रेस कमिटी, अखिल भारतीय चरखा संघ, खद्दर भण्डार और बिहार केन्द्रीय रिलीफ अधिकोष के खातों में जमा सभी धनराशि आदि जब्त कर ली गयी. यहाँ तक की समाचार के प्रकाशन पर भी कठोर प्रतिबंध लगा दी गयी.

राष्ट्रीय नेताओं की गिरफ्तारी की खबर पूरे प्रान्त में आग की तरह फैल गई. लोगों में एक भीषण उत्तेजना, विक्षोभ एवं रोष व्याप्त हो गया. राजेन्द्र बाबू की गिरफ्तारी की खबर पाते ही पटना के छात्रों ने एक विशाल जुलूस निकाला. बी.एन. कॉलेज से जुलूस निकलकर पटना के प्रमुख सड़कों से होते हुए विश्वविद्यालय परिसर पहुंचा. छात्रों ने बांकीपुर जेल के सामने धरना-प्रदर्शन किया. गांधी मैदान में भगवती देवी की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन भी किया गया. लगभग यही स्थिति पूरे राज्य भर में थी. जगह-जगह सभा आयोजित की गयी, जुलूस निकाले गए तथा प्रमुख प्रतिष्ठानों पर झंडा फहराया गया. स्कूल-कॉलेजों में हड़ताल रखी गयी.

छात्रों के अलावा मजदूरों एवं किसानों ने भी इस आंदोलन में सम्पूर्ण सहयोग किया. जमशेदपुर में 9 अगस्त को हजारों मजदूरों ने सभा आयोजित कर 9,10 एवं 11 अगस्त को हड़ताल पर गए. रोहतास उद्योग के मजदूरों ने जुलूस निकाला. गया शहर पूरी तरह बंद रहा और मजदूर हड़ताल पर चले गये.