महाबोधि मंदिर की सुरक्षा में सीआईएसएफ जवानों की तैनाती को लेकर दो भागों में बटे बौद्ध भिक्षु

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गया समाचार/ संवाददाता – (Gaya News) विश्वदाय महाबोधि मंदिर की सुरक्षा में अब सीआईएसएफ जवानों की तैनाती होने जा रही है। लेकिन इसको लेकर इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉउंसिल ने विरोध किया है। उसका कहना है कि पहले जवानों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण लेना होगा । 7 जुलाई 2013 को महाबोधि मंदिर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के बाद से ही सीआईएसएफ जवानों की तैनाती की मांग की गई थी। केंद्र सरकार ने महाबोधि मंदिर की सुरक्षा को केन्द्रीय औद्दोगिक सुरक्षा बल की तैनाती को मंजूरी दे दी है।

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केंद्र की इस पहल के बाद बोधगया के बौद्ध भिक्षु दो भागों में बंट गए हैं। कुछ बौद्ध भिक्षुयों ने इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि वह खुद सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की मांग के लिए हाईकोर्ट तक जा पहुंचे हैं। बिहार के कई वरीय पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से सर्वे किया था, जिसमें इस बात को दर्शाया था कि वर्तमान सुरक्षा से महाबोधि मंदिर सुरक्षित नहीं है । हालांकि यह मामला 2013 में बोधगया में बम ब्लास्ट के बाद सूबे की सरकार की पहल पर केंद्र ने स्वीकार्य कर लिया था। लेकिन उसके खर्च का वहन, आवासन, भोजन सहित कई मामलों को लेकर अटका था। अब राज्य सरकार ने खर्च की सहमति दे दी है। सर्वेक्षण के अनुसार महाबोधि मंदिर की पूर्ण सुरक्षा के लिए 261 सुरक्षाकर्मियों की उपलब्धता बताई है। वही इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉउंसिल के महासचिव ने बताया कि बन्दूक के साये में साधना और ध्यान नहीं हो सकती है। मन्दिर में कई देशों से बौद्ध श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक आते हैं और उनमें एक धर्म की भावना होती है, जो हर कोई पवित्र महाबोधि वृक्ष की छावं में बिताना चाहता है। जबकि सीआईएसएफ का प्रशिक्षण में सभी को संदेह के घेरों से दिखने को मिलता है। ज्यादा जांच और तलाशी से बौद्ध श्रद्धालुयों के आस्था को ठेस पहुंचेगी। पर्यटन मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के शिकार होंगे। अभी यहां बीएमपी के जवान हैं जो तलाशी के दौरान महिला पुरुषों के कई अंगो को पकड़कर तलाशी लेते हैं। जिससे उनको असहज महसूस करना पड़ता है और जब सीआईएसफ की तैनाती होगी तक यह सब और होगा। अगर सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती होती है तो कॉउंसिल इसका विरोध नहीं करती है, बल्कि उन्हें मन्दिर में विदेशियों और बौद्ध भिक्षुयों के साथ कैसे व्यवहार करें, जांच और तलाशी कैसे ली जाए, इसका प्रशिक्षण देने की जरूरत है।