स्वस्थ जीवन की पोल खोलती ये तस्वीर, अस्पताल है या जुआखाना…

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मोतीहारी समाचार – एक तरफ विकास के मुद्दे को लेकर सत्ता में आई यूपी के योगी सरकार में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है वहीँ दूसरी ओर बिहार में अपने को विकास पुरुष कह कर सत्ता काबिज हुए नीतीश सरकार के विकास की जो तस्वीर हम आपके सामने रखने जा रहे हैं उसे देख कर आप सोचने पर जरुर मजबूर हो जाएंगे।

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आखिर यह कैसा विकास जहां लोगों को जीवन दान देने वाले अस्पताल में ही खुलेआम जुआ होते हों। जहां कभी-कभी अस्पताल खुलते हो… वहां जुआ भी क्यों न…! आखिर बंद पड़े अस्पताल में सुन-सपाट जगह पर जो उन्हे जुआ खेलने का मौका मिल जाता है ! यही नहीं अस्पताल के कर्मचारी तो इस घटना से ही अनजान है। अब आप ही बतायें आप इसे अस्पताल कहेंगे या जुआखाना…हम बात कर रहे हैं मोतिहारी के पकड़ी दयाल प्रखंड में स्थित सिसह्नी ग्रामीण अस्पताल का जहां ग्रामीण रोज बैठकर जुआ खेलते हैं । लोगों को स्वस्थ जीवन देने के ख्याल से लाखों की लागत से बनी यह अस्पताल आज अपने आप को कोस रही है।

मौके पर मौजूद स्थानीय निवासी राजकुमार का कहना है कि जुआ की खेल का आप लाइव तस्वीर भी यहां देख सकते हैं। यहां पर आए दिन यह खेल होते रहता है। आप भी देख सकते है किस तरह से अख़बार के पन्ने बिछाकर ग्रामीण तास के पत्ते फेक बेहिचक जुआ खेल रहे हैं। जब पूछा गया कि आखिर अस्पताल में खुलेआम जुआ हो रहा है तो इसमें मरीजों का इलाज कहां और कब होता होगा।

इसपर जुआरियों का साफ कहना है कि ये है तो सरकारी अस्पताल…पर यहां कोई सरकारी कामकाज नहीं होता है। इसमें लोग बेहिचक तास के पत्ते फेक जुआ खेलते हैं और मवेशी बांधते हैं…वहीं मौजूद ग्रामीण ध्रुव साह ने कहा कि आपने साफ शब्दों में सुना की ये है तो सरकारी अस्पताल पर शायद ही कभी मरीज के इलाज के लिए खुलता हो। जिनको इस अस्पताल की कुव्यवस्था की लड़ाई लड़नी चाहिए वे नेताओं के यहां भी जुआ का जमघट लगाते हैं … अस्पताल की इस कुव्यवस्था के बारे में अधिकारियों से जब जानना का जब प्रयास किया गया तो मोतिहारी सिविलसर्जन का जो बयान आया वो सूबे की सरकार के विकास के कार्यों पर खुद प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है ?

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सिविलसर्जन प्रशांत कुमार ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की बातों का मुझे जानकारी नहीं है। ये तो आपसे ही सुनने को मिल रही है। अबतक वे अंजान रहने वाले उस सिविलसर्जन का भला हों ! और भला हो भी क्यों न… जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री ही कृष्ण-कन्हैया बन बासुरी बजाने से मसगुल हैं। स्वास्थ्य मंत्री को बासुरी बजाने से फुर्सत मिले तब तो वे अपने राज्य की जनता के स्वास्थ्य की जानकारी लेंगे।

बहरहाल मोतिहारी सिविलसर्जन प्रशांत कुमार ने ये आश्वासन जरुर दिया है की दोषी अस्पताल कर्मियों पर जरुर कार्यवाई होगी । अब देखना यह है कि कर्रवाई कब-तक होती है। वैसे इतना जरुर है कि सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था के कारण ही प्राइवेट चिकित्सा व्यवस्था मजबूत हो रही है।