21वीं सदी में लाल बहादुर शास्त्री की तरह तैरकर स्कूल जाते हैं हजारों बच्चे

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पटना: स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री गंगा नदी में तैरकर स्कूल जाते थे। वर्ष 1915-16 के दौरान की बात है अब सौ साल बीत गए, वक्त बदल गया पर अब भी हजारों बच्चे नदी-नालों को पार कर स्कूल जाने को अभिशप्त हैं। इसमें खुद लाल बहादुर शास्त्री का जिला भी शामिल है।

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‘हिन्दुस्तान’ ने यूपी, बिहार, झारखंड में पड़ताल की। इसमें सैकड़ों ऐसे गांव मिले जहां छात्र 21वीं सदी में भी नदी में तैरकर, बांस के बने पुल से, रस्सी के सहारे या नाव से स्कूल जाने को मजबूर हैं। यूपी के कम से कम 17 जबकि बिहार-झारखंड के 20-20 जिलों के गांवों में ऐसे हाल हैं। यह स्थिति तब है जब शिक्षा के अधिकार कानून को लागू हुए छह साल हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के म्याऊ ब्लॉक के गांव सिमरिया देंदू में बच्चे रामगंगा नदी पार करके स्कूल जाते हैं। कटान की वजह से अब स्कूल भी एकदम नदी किनारे पहुंच चुका है।

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बिहार के सीतामढ़ी के करीब एक दर्जन स्कूलों के रास्ते में नदी पर पुल ही नहीं है। वहीं, समस्तीपुर के रोसड़ा में बूढ़ी गंडक नदी पर छात्रों के स्कूल जाने का एकमात्र रास्ता जर्जर हो चुका पुराना रेलवे पुल है।

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यही कारण है कि 29 फीसदी छात्र कक्षा 4 से पहले स्कूल छोड़ देते हैं। 43 फीसदी बच्चे हाईस्कूल करने से पहले पढ़ाई बंद कर देते हैं। देश में लगभग 14 लाख स्कूल हैं जबकि 77 लाख शिक्षक हैं।

साभार : हिन्दुस्तान