जैक और रोज़ बनने से बचिए वरना हो जाएगा कोरोना !

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कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जिसे जीवन में कभी यत्र-तत्र थूकने वालों पर क्रोध न आया हो. ये बुरी आदत ऐसी कि इस वजह से कई कार्यालयों आदि में जाना बड़ा नागवार गुजरता है.

बड़ी ही घटिया आदत है थूकना पर तब ही तक जब तक कोई और थूक रहा होता है. हालांकि इसके कुछ अपवाद भी मिलेंगे. जब सुपरहिट और कालजयी फ़िल्म टाइटैनिक में जैक, रोज़ को थूकना सिखाता है तब दर्शकों को गज़ब सा रोमांच महसूस होता है मानो रोमांस की नई परिभाषा ही गढ़ी जा रही हो. थूकने की भी कोई प्रतियोगिता हो सकती है, ये उस फ़िल्म ने ही हमें सिखाया. पर जैक और रोज़ की मासूमियत भरी ये अदा जानलेवा सिद्ध हो सकती है असल जिन्दगी में खासकर कोरोना काल में क्यूंकि थूकने से कोविड१९ के संक्रमण का खतरा फैलता है. साथ ही यह दंडनीय अपराध भी है. इसलिए सभी जैक और रोज़ बनने से बचें.

वैसे एक और फ़िल्म है जिसने इस विधा को यादगार बना दिया. मुन्नाभाई एमबीबीएस का वो दृश्य याद है न जब मुन्ना भाई के कहने पर एक व्यक्ति बार-बार थूक कर सीढियों को गंदा करने वाले अपने पड़ोसी को गांधीगीरी से ठीक करता है?

बिहार में ये समस्या गंभीर है और आज तक कोई गांधीगीरी इसे ठीक कर नहीं पाई. पान, तम्बाकू, खैनी आदि यहाँ खूब खाया जाता है और ये सब चबाकर उसे सडकों या यहाँ-वहां थूक डालना आम बात है. ऑफिस, कोर्ट, स्कूल-कॉलेज, सिनेमाघर, मार्केट आदि पान के थूक से जरुर रंगें होते हैं. बिल्डिंगों के कोने लाल ना हों तो लोग ताज्जुब करते हैं. इस परेशानी से निबटने के लिए कई तरह के तरकीब अपनाएं जाते हैं जिनमें सबसे अहम् है उन जगहों पर भगवान की तस्वीरें या धार्मिक चिन्ह लगाना जहां थूकने की आशंका ज्यादा हो. पर कई जगहों पर देखा गया कि लोग बगल में थूक कर निकल जाते हैं.

थूकना इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर कई मुहावरे भी बने हैं और अगर किसी का अपमान करना हो तो उसके मुंह पर थूकना बेहद प्रभावकारी माना जाता है. बाद में जो हो सो हो. वैसे लोग गुस्से में ये भी कहते हैं कि फलां के घर पर तो उन्हें थूकना भी पसंद नहीं. पर शायद अपने शहर से लोगों को इतना ‘प्यार’ होता है कि दिल खोलकर थूकते चलते हैं.

थूकने पर इतनी जानकारी देनी जरूरी इसलिए है क्यूंकि कोरोना के भेष में लगता है इससे निबटने का शायद रास्ता मिल जाए. केंद्र और राज्य सरकार थूकने पर कोरोना फैलने की संभावना के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं. क्या पता थूकते हुए पाए जाने पर लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ जाए ? हो सकता है इस डर से लोग थूकना ही छोड़ दें ! और भी अच्छा हो कि थूकने पर फाइन देना पड़े. सरकार को इस बहाने कुछ आमदनी भी हो जाएगी.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राज्य सरकारों द्वारा इसके लिए जागरूकता फैलाई जा रही है तो ये उम्मीद जगती है कि शायद लोग सार्वजनिक स्थानों को अपनी इस बुरी आदत से मैला करने और लोगों में बीमारी फैलाने से बचेंगे. इसी बहाने स्वच्छता को भी मौक़ा मिलेगा.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा साझा किए गए विडियो आप यहाँ देख सकते हैं…..

https://twitter.com/MoHFW_INDIA/status/1266225414114074624?s=20

https://twitter.com/MoHFW_INDIA/status/1265221283941359617?s=20

https://twitter.com/MoHFW_INDIA/status/1265153336908623872?s=20

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