आज देशभर में मनाई जा रही है बकरीद, जानें क्या हैं मान्याताएं

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PATNA: आज पूरे देश में बकरीद का त्योहार है, जो मुसलमान भाईयों के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है. आज देशभर में बकरीद मनाई जा रही है.  ईद उल अजहा या ईद उल अदहा बकरीद को कहा जाता है. इसका अर्थ है कुर्बानी की ईद. इस्लाम को मानने वाले दो ईद मनाते हैं. पहली ईद रमजान का महीना खत्म होते ही आती है, उसे मीठी ईद भी कहा जाता है. दूसरी ईद कुर्बानी की ईद होती है, जिसे रमजान का महीना खत्म होने के लगभग 70 दिन बाद मनाया जाता है.

कोरोना ने फिकी की बकरीद की रोनक

कोरोना महामारी को लेकर इस बार बकरीद की त्योहार में कोई खास रौनक नहीं दिख रही है. लेकिन लोगों ने त्योहार को लेकर जरूरी सामानों की तैयारियां की है. बकरे की कुर्बानी घरों के अंदर ही दी जाएगी. छोटे-छोटे बच्चों में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है. लोग घरों के अंदर ही बकरीद की नमाज अता कर रहे हैं और एक-दूसरे को दूर से ही बिना गले मिले ईद की मुबारकबाद दे रहे हैं.

बकरीद, ईद-उल-अजहा का महत्व

बकरीद का दिन फर्ज-ए-कुर्बानी का दिन होता है. इस्लाम में मुस्लिमों और गरीबों का खास ध्यान रखने की परंपरा है. इस वजह से बकरीद पर गरीबों का विशेष ध्यान रखा जाता है. इस दिन कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं. इन तीन हिस्सों में खुद के लिए एक हिस्सा रखा जाता है, एक हिस्सा पड़ोसियों और रिश्तेदारों को बांटा जाता है और एक हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों को बांट दिया जाता है. इसके जरिए मुस्लिम लोग पैगाम देते हैं कि वो अपने दिल की करीब चीज भी दूसरों की बेहतरी के लिए अल्लाह की राह में कुर्बान कर देते हैं.

क्यों मनाते हैं बकरीद

इस्लाम में बकरीद का विशेष महत्व है. इस्लामिक मान्यता के मुताबिक हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान किया था. तब खुदा ने उनके जज्बे को देखकर उनके बेटे को जीवन दान दिया था. इस पर्व को हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है. इसके बाद अल्लाह के हुक्म के साथ इंसानों की जगह जानवरों की कुर्बानी देने का इस्लामिक कानून शुरू किया गया.