खतरे में उमगा सूर्य मंदिर का अस्तित्व

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औरंगाबाद : जिले के ऐतिहासिक उमगा सूर्य मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण इस मंदिर के ऊपर न तो किसी अधिकारी का ध्यान है और ना की पर्यटन विभाग का। इस मंदिर में उपयोग किये गए चट्टानों में दरारें पड़ने लगी है। नित्य दिन लगभग हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं। ज्ञात हो कि, उमगा सूर्य मंदिर का निर्माण त्रेता युग में हुआ था। जिसमे राजा भैरवेंद्र के द्वारा 1496 में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित की गयी थी। 52 मंदिरों का समावेश इस पर्वत पर भगवान शंकर, गणेश, विष्णु आदि की अनेक प्रतिमाएं स्थापित की गयी है।

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यहाँ की प्राकृतिक बनावट पर्यटकों को आकर्षित करता है। लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की खासियत है कि इसकी बनावट में ईंट, बालू का प्रयोग नहीं किया गया है। बड़े-बड़े चट्टानों को काटकर इस मंदिर की रूप रेखा को तैयार किया गया है। मंदिर के ऊपरी भाग पर घास उग चुके हैं, जो इसे कमजोर कर रहे हैं। इसकी सफाई के लिए किसी प्रकार की कोशिश नहीं कि जा रही है। हर वर्ष माघ महीने में वसंत पंचमी के दिन तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेला का आयोजन किया जाता है। जिसमें लाखों लोग यहाँ दर्शन करने आते हैं।

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कई बार इसे पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग स्थानीय लोगों के द्वारा की गयी, लेकिन अभी तक अधूरा है। हालाँकि पर्यटन विभाग के द्वारा इसके सीढ़ियों पर टाइल्स लगाने का काम कुछ महीने पूर्व शुरू किया गया था। लेकिन टाइल्स की गुणवत्ता खराब होने और पर्यटन विभाग के दिशा निर्देश के अनुसार कार्य नहीं होने की वजह से मगध आयुक्त, जिलाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा रोक लगा दिया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी बालमुकुंद पाठक ने बताया की उमगा सूर्य महोत्सव के दौरान जिलाधिकारी ने मंदिरों की साफ़-सफाई और चट्टानों में पड़ने वाली दरारें को भरने की बात कही थी लेकिन उसके बाद इस ओर कोई कदम नहीं बढ़ाया गया है। दर्शन करने आये श्रद्धालुओं के द्वारा इस ओर बार-बार ध्यान दिलाया जाता है।

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मुख्य पुजारी ने कहा की पर्यटन विभाग के आला अधिकारीयों का आगमन कई बार हो चुका है। लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं। जब तक इस स्थल को पर्यटन स्थल नहीं घोषित किया जायेगा। तब तक इसका विकास संभव नहीं है। कई बार पुरातत्व विभाग के अधिकारी आये और यहाँ पर स्थापित प्रतिमाओं का अवलोकन किया। खनन विभाग के अधिकारीयों ने इस पर्वत में अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ होने की बात कही लेकिन उसकी खोज नहीं की गयी है। पर्वत पर अनेक प्रकार के औषधीय पौधें हैं जो कई संकीर्ण बीमारियों में काम आते हैं। उन्होंने जिलाधिकारी महोदय और पर्यटन विभाग से मांग की है की मंदिर के अस्तित्व को बचाने और पर्यटन स्थल घोषित करने के लिए सार्थक कदम उठायें जाए, ताकि इस ऐतिहासिक सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार हो सके और पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सके।
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