उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि एनडीए में कुछ लोग हैं जो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री भी नहीं देखना चाहते

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पटना – खीर विवाद से उत्साहित राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा ने अब नए अंदाज में खीर की व्याख्या की. यदुवंशी को कुछ लोग कृष्णवंशी कहते हैं उनका दूध, कुशवंशी को अब रामवंशी कहा और उनका चावल, ब्रह्मर्षि का गुड़, अति पिछड़े समाज से पंचमेवा और दलित के यहां से तुलसी का पत्ता, मुस्लिम भाई के घर से दस्तरखान जहां न कोई ऊँच न नीच. दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, अगड़ी जाति, मुसलमान के साथ बैठकर खीर बनाएंगे.

उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि एनडीए में कुछ लोग हैं जो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री भी नहीं देखना चाहते. उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह साफतौर पर जाहिर किया कि पार्टी में फूट है.

दरअसल पटना में बीपी मंडल के जयंती समारोह में उन्होंने साफ संकेत दिया था कि बिहार में यदुवंशी के संग कुशवंशी की जरूरत है. मतलब उन्होंने समझाया यादव की दूध और कुशवाहा की चावल मिल जाए तो खूब अच्छी खीर बनेगी. खीर में पंचमेवा की जरूरी पड़ती है. दूध और चावल के साथ पंचमेवा के रूप में मिथिला में पंचफोड़न के लिए पिछड़ा, अति पिछड़ा और शोषित पीड़ित के पंचमेवा की भी आवश्यक पड़ता है. खीर बिना चीनी का तैयार नहीं होता चीनी तो बड़े लोगो के घर में होता है चीनी पण्डित के घर से आ जाएगा.

उन्होंने कहा था कि पूरा भोजन तैयार होने के बाद तुलसी जल की जरुत पड़ती है इसके लिए चौधरी जी के घर में तुलसी के पेड़ बहुत है. तुलसी जल उनके घर से आ जाएगा भोजन पड़ोसन के लिए दस्तरख़ान की जरूरत पड़ती है इसके लिए जुल्फिकार अली के घर से दस्तरखान ले आएंगे और सब मिल कर स्वादिष्ट खाना की स्वाद लेंगे.

उपेन्द्र कुशवाहा के खीर वाले बयान पर राजनीति कयास लगाये जा रहे हैं, राजद नेता भाई बीरेन्द्र ने कहा कि दूध से खीर भी बनता है और पंचमेवा भी बनता है. पंचमेवा का मतलब दलित, महादलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक है. कुश से चावल भी बन जायेगा और दूध हमारे पास है। उससे खीर भी बन जाएगा. उन्होंने कहा कि महागठबंधन में शामिल होने वाले हैं उपेन्द्र कुशवाहा जी. वो एनडीए में असहज महसूस कर रहे हैं. नरेन्द्र मोदी और उस कुनबे के लोग द्वारा संविधान से छेड़छाड़ कर रहे हैं. उस छेड़छाड़ को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं.