जब लालू ने अनोखे अंदाज़ में एयर होस्टेस से कहा, ए सिस्टर ई काजू खाने नहीं दे रहा !

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पटना – एक बार फिर राजद सुप्रीमो लालू यादव सुर्ख़ियों में हैं. वो भी एक वक्त था जब वे बिहार के मुखिया थे और अपने अनोखे बयानों से आये दिन अखबारों और चैनलों पर छाए रहते थे. आज भी वही लालू छाए हैं लेकिन फर्क इतना सा है कि पहले पद पर रहकर सबों के आकर्षण के केंद्र थे और आज घोटालों की वजह से. बुधवार 29 अगस्त को लालू पटना से रांची पहुँचे. उनके साथ विधायक भोला यादव भी हैं मौजूद. तीन बजे की उड़ान से लालू रांची जा रहे थे. रांची में उनकी स्वास्थ्य की जांच हुई, आज यह तय हो गया कि लालू पहले जेल जाएंगे और औपचारिकता खत्म होने के बाद उन्हें रिम्स भेज दिया जाएगा. दरअसल लालू ने आज रांची हाईकोर्ट में सरेंडर कर दिया है. उनकी औपबंधिक जमानत अवधि 30 अगस्त यानी कि आज खत्म हो रही है. कोर्ट ने यह अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट के निर्देश के अनुसार ही उनके इलाज व रहने की व्यवस्था की जाएगी.

बता दें कि रांची उच्च न्यायालय में 24 अगस्त को लालू यादव की औपबंधिक जमानत याचिका पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया था साथ ही 30 अगस्त तक सीबीआई की अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया. हालांकि वकीलों ने मेडिकल ग्राउंड पर प्रोविजनल बेल की अवधि बढ़ाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

बात कल की है, जब पटना से रांची की फ्लाइट से लालू अपने सहयोगी भोला यादव के साथ जा रहे थे. हवाई जहाज़ में एयर होस्टेस ने खाने के लिए उन्हें काजू का बॉक्स दिया. लालू ने काजू खाया. उनसे मीडियाकर्मी बात करने आए तब एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज़ का परिचय देते हुए हंस कर उन्होंने एयर होस्टेस से कहा कि ” मेरा पैसा पूरा डूब गया. ए सिस्टर ई काजू खाने नहीं दे रहा. ” जब उनसे उनकी तबियत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मीडियाकर्मी से चुटकी लेते हुए कहा कि ” बेकार का बात, जाओ ना और ख़राब कर रहे हो तबियत.”

लालू ने बातों ही बातों में बिहार की मौजूदा स्थिति पर कहा कि बिहार में जो स्थिति है उससे दुनिया शर्मसार है. जब उनसे यह पूछा गया कि प्रधानमन्त्री कौन बनेंगे तो उन्होंने कहा कि ” वो हमलोग तय कर लेंगे.”

वहीँ पटना से रांची जाने के पूर्व उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि बहुत जगह इलाज कराए लेकिन पूरी तरह से निरोग नहीं हुए. न्यायालय का आदेश है जब भी बीमार पड़ेंगे विचार किया जाएगा. अस्पताल में आराम करने का मुझे शौक नहीं है. न्यायपालिका पर हमको पूरा भरोसा है. आज न कल न्याय मिलना है.