जब भगवान गणेश इस विश्वविद्यालय के बी कॉम के छात्र बनें !

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दरभंगा- जब भारत में गणेश जी दूध पी सकते हैं, तो किसी कॉलेज में क्यूँ नहीं पढ़ सकते ? ठीक ही तो है अगर किसी विश्वविद्यालय ने उन्हें बी कॉम का छात्र बना लिया ! अब वाणिज्य ही तो पढ़ेंगे देवा ! किसी भी व्यापारी से पूछ लीजिए कौन हैं उसके प्रिय भगवान – चट जवाब आएगा – गणेशा ! कोई भी व्यापारिक अनुष्ठान बिना विघ्नहर्ता के पूजा की संपन्न होती है क्या ? नहीं ना, तो हुआ यूं कि आज कल अपने गणेशु बिहार आ गए हैं – नए परिवेश में जब देश की अर्थव्यवस्था की चर्चाएँ उबाल पर हैं तो गणपति ने सोचा क्यूँ न नॉलेज अपडेट कर लिया जाए! तो वे कहाँ पहुंचे ? वे पहुंचे बिहार के दरभंगा जिला के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय|

ये विश्वविद्यालय कुछ वर्षों से अपने काम से ज्यादा अपने कारनामों के लिए सुर्खियाँ बटोरता रहा है, इस बार विश्विद्यालय ने तो ऐसा कमाल किया कि कोई सपने में भी नहीं सोच सकता! इनकी करतूत से छात्र तो छात्र, खुद भगवान् भी सकते में हैं क्यूंकि विश्विद्यालय ने काम ही कुछ ऐसा किया है|

विश्विद्यालय से जारी एक एडमिट कार्ड को देख कर तो कुछ ऐसा ही लगता है जहां न सिर्फ छात्र की तस्वीर की जगह भगवान गणेश की तस्वीर लगी एडमिट कार्ड जारी की गई है बल्कि भगवान गणेश के साक्षात हस्ताक्षर भी दिख रहे हैं| अब भला विश्विद्यालय के अधिकारी को कौन समझाए कि भगवान गणेश भला स्वर्गलोक छोड़ कर इनके विश्विद्यालय से परीक्षा देने क्यूँ और कैसे आये और उन्हें बी कॉम करने की क्या जरुरत पड़ी| साथ ही सवाल ये भी है कि कोइ छात्र भला अपना पैसा खर्च कर भी अपना फॉर्म भरने के बजाय भगवान गणेश का फार्म क्यूँ भरेगा, यह तो समझ से बिल्कुल परे है| 

दरअसल दरभंगा जे एन कॉलेज, नेहरा के एक छात्र कृष्ण कुमार रॉय ने B.Com. Part -1 का परीक्षा फार्म अपने कालेज से ऑनलाइन भरा| परीक्षा 9 अक्टूबर से शुरू होने वाला है| फॉर्म सही सलामत बारीकियों के साथ भर दिया। इसके लिए उसने अपनी फीस भी भरी लेकिन परीक्षा से पहले जब उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर देखा तो उसके पैरो तले की जमीन ही खिसक गयी। विश्विद्यालय ने जो उसे एडमिट कार्ड दिया, उसमें छात्र कृष्ण कुमार रॉय की फोटो की जगह न सिर्फ भगवान गणेश की तस्वीर लगी थी बल्कि भगवान् गणेश के हस्ताक्षर भी किये मिले जिसके बाद छात्र ने इसकी शिकायत कॉलेज में की| 

बात नहीं बनने के बाद विश्विद्यालय में भी इसकी शिकायत दर्ज़ करा तो दी पर कोइ कार्रवाई नहीं होता देखा तो विश्विद्यालय के चक्कर लगाने पर मज़बूर हो गया। अंत में पीड़ित छात्र ने इसकी जानकारी मीडिया को दी जिसके बाद विश्विद्यालय प्रशासन जागा जरूर लेकिन इसका ठीकरा साइबर कैफे पर फोड़ अपना दामन साफ़ बताया।

हालांकि परीक्षा नियंत्रक कुलानंद यादव ने मीडिया के दखल के बाद न सिर्फ पीड़ित छात्र को परीक्षा देने की अनुमति दी बल्कि गलती किस स्तर पर हुई उसे देखने और सुधारने का आश्वासन भी दिया, वे भी मानते हैं कि ऐसी घटना से विश्विद्यालय की छवि खराब होती है।