तो क्या दुबारा जेल जाएंगे शहाबुद्दीन ?

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पटना: सीवान के बाहुबली राजद नेता मों. शहाबुद्दीन पर दोबारा जेल जाने का खतरा मंडराने लगा है। सात सितंबर को पटना हाईकार्ट से जमानत मिलने का बाद 11 साल बाद शहाबुद्दीन जेल से बाहर आया था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जमानत के खिलाफ हुई सुनवाई में अदालत ने शहाबुद्दीन से पूछ लिया है कि क्यों न हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी जाए?

शहाबुद्दीन की वजह से अपने बेटों को गंवाने वाले चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू और बिहार सरकार की तरफ से दाखिल अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल किया है। मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।

सोमवार को लगभग 38 मिनट तक चली सुनवाई में चंदा बाबू के वकील प्रशांत भूषण ने हाईकोर्ट के आदेश का पुरजोर विरोध किया। हाईकोर्ट ने मुकदमा शुरू होने में देरी की एक वजह इस बात को भी बताया कि शहाबुद्दीन सिवान की जगह भागलपुर की जेल में बंद है। हाई कोर्ट अगर चाहता तो भागलपुर जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिये मुकदमा चलाने का आदेश दे सकता था. लेकिन उसने ऐसा करने की बजाय शहाबुद्दीन को ज़मानत दे दी।

मुकदमा शुरू होने में देरी को आधार बना कर इस तरह के कुख्यात अपराधी को ज़मानत देना गलत था। हाई कोर्ट ने इस बात की उपेक्षा की कि शहाबुद्दीन 8 मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है। इनमें से 2 हत्या के मामले हैं। अब भी 40 से ज़्यादा मुकदमे लंबित हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में शहाबुद्दीन क्लास ए हिस्ट्रीशीटर के तौर पर दर्ज है। यानी उसके सुधरने की कोई संभावना नहीं है। शहाबुद्दीन को बिहार से बाहर किसी जेल में ट्रांसफर किया जाए। वहां से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी लंबित मुकदमे चलाए जाएं।

शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने से पूरे सिवान में दहशत का माहौल है। तमाम लंबित मुकदमों के गवाह डरे हुए हैं। इन दलीलों के साथ प्रशांत भूषण ने हाई कोर्ट के फैसले पर तुरंत रोक लगाने की दरख्वास्त की। बिहार सरकार की तरफ से कोर्ट में मौजूद वकील गोपाल सिंह ने भी इस मांग का समर्थन किया।

दोनों वकीलों को सुनने के बाद जस्टिस पीसी घोष और अमिताव रॉय की बेंच ने शहाबुद्दीन को नोटिस जारी कर दिया। अगर अगले सोमवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा देता है तो शहाबुद्दीन को दोबारा जेल जाना पड़ेगा।

सिवान के चंदा बाबू के दो बेटों, गिरीश और सतीश को अगस्त 2004 में तेज़ाब से जला कर मार डाला गया था। घटना के चश्मदीद गवाह, तीसरे बेटे राजीव की भी जून 2014 में हत्या कर दी गई।

गिरीश और सतीश की हत्या में शहाबुद्दीन को दोषी मान कर उम्र कैद की सज़ा दी गई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उसके 10 साल से भी ज़्यादा समय से जेल में रहने को आधार बना कर ज़मानत दे दी थी। ये आदेश इस साल मार्च में आया था।

राजीव की हत्या से जुड़ा मुकदमा अभी शुरू नहीं हो पाया है। मुकदमा शुरू होने में हो रही देरी को आधार बनाकर हाई कोर्ट ने 7 सितंबर को शहाबुद्दीन को ज़मानत दे दी। इस तरह लगभग 11 साल से जेल में बंद आरजेडी नेता के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया।