बौद्ध शिक्षा के प्राचीन केंद्र के पुनरुत्थान के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से करेंगे बात- प्रणब मुखर्जी

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भागलपुर समाचार – (Bhagalpur News) राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बिहार के भागलपुर स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय का सोमवार को दौरा किया । दौरे के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह बौद्ध शिक्षा के इस प्राचीन केंद्र के पुनरुत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करेंगे।

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उन्होने कहा कि विक्रमशिला के भग्नावशेष का महज संग्रहालय नहीं बनना चाहिए बल्कि नालंदा की तरह इसका विकास किया जाना चाहिए । भारत को ऐसे विश्वविद्यालयों की जरुरत है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षण केंद्र अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। मैं कॉलेज के दिनों से ही इस तरह के केंद्रों को देखने को उत्सुक था और यहां इसके पुनरुत्थान के लिए लोगों के प्रेम और भाव को देखकर हम भाव विह्वल हूं।

राष्ट्रपति ने कहा कि विक्रमशिला सिर्फ एक संग्रहालय नहीं होना चाहिए, इसे उच्चतम स्तर के मानक के रुप में विकसित किया जाना चाहिए। देश में उच्च शिक्षा अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता है। इन केंद्रों द्वारा छात्रों को पर्याप्त शैक्षणिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। यह केवल तभी संभव है जब शीर्ष शिक्षा संस्थान हमारे उच्च शिक्षा परिदृश्य से स्नेह करें। हमारे देश में इस तरह के विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है। इनका विकास नालंदा की तरह होना चाहिए। विक्रमशिला विश्वविद्यालय को श्रेष्ठ संकाय का केंद्र होना चाहिए तथा अनुसंधान के लिए विदेशी संस्थानों से सहयोग करना चाहिए । साथ ही स्थानीय नवोन्मेषकों के साथ संबंध स्थापित करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राचीन विक्रमशिला का स्मारक तथा संग्रहालय हमें याद दिलाता है कि इसने एक ऐसे युग का परावर्तन किया जहां शिक्षण की एक समृद्ध संस्कृति फली-फूली। पाल वंश के शासन के दौरान भारत में बौद्ध शिक्षण के दो महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक इस संस्थान की स्थापना राजा धर्मपाल ने बौद्ध और तांत्रिक शिक्षा के एक केंद्र के रुप में की थी। विक्रमशिला को ‘बौद्ध सर्किट’ में शामिल करने के बाद राष्ट्रपति के दौरे से इसके अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित होने में मदद मिलने की उम्मीद है। भागलपुर के पूर्व में करीब 50 किलोमीटर तथा भागलपुर-साहिबगंज प्रखंड में कहलगांव रेलवे स्टेशन के 13 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित केंद्र में प्राचीन समय में अनुसंधान के लिए बौद्ध भिक्षु और विद्वान रहते थे। तेरहवीं सदी के शुरू में हृास की शुरुआत होने से पहले विश्वविद्यालय चार सदियों तक खूब फला-फूला। विक्रमशिला ने अनेक हस्तियां दीं। विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विद्वानों को विभिन्न देश बौद्ध शिक्षा,संस्कृति और धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए आमंत्रित करते थे।

जनसभा का स्वागत भाषण संतोष दुबे व समापन केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुढ़ी ने किया। इस दौरान जिला प्रशासन ने विक्रमशिला प्रतीक चिह्न भेंट किया व इस्टर्न प्रेस क्लब की विक्रमशिला पर आधारित किताब का विमोचन हुआ। मौके पर सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे, मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, कहलगांव विधायक सदानंद सिंह, पीरपैंती विधायक रामविलास पासवान आदि मौजूद थे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भाषण के अंत में लोगों से कहा, अच्छा स्वागत किया, इसके लिए बधाई। गरमी बहुत है लेकिन फिर भी आपने कष्ट करके समारोह में भाग लिया। हिंदी ठीक से बोल नहीं सकता, माफी चाहता हूं।