Home Creative Corner हर घर कहती यही कहानी रही

हर घर कहती यही कहानी रही

75
0

राहों पे बाट जोहती जवानी रही
मेरे गाँव की यही निशानी रही

जो कदम गए , कभी लौटे नहीं
सदियों तलक यही परेशानी रही

पनघट, खेत, नदी-नाले रोते रहे
दिन-रात हर जगह वीरानी रही

माँ को सोए हुए एक अरसा हुआ
हर घर कहती यही कहानी रही

सब दोस्त तड़प उठे विदाई पर
सीने की उफ़क बेज़ुबानी रही

खत में नाम-पता सब दिखता है
बेचैन होती हुई रूह सयानी रही

सलिल सरोज

B 302 तीसरी मंजिल
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट
मुखर्जी नगर
नई दिल्ली-110009
Mail:salilmumtaz@gmail.com

Share
Previous articleबिहार में अगले 6 महीने में होगा 6 करोड़ लोगों का टीकाकरण – मुख्यमंत्री
Next articleA Bird envisaging desire

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here