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भगवान श्री कृष्ण के जन्म से पूर्व रोज ग्रामीणों द्वारा गायी जाती है नारदी

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मुकेश कुमार सिंह

भगवान श्री कृष्ण के जन्म से पूर्व रोज ग्रामीणों द्वारा गायी जाती है नारदी। 19वीं सदी के शुरुआत से प्रसिद्ध है कृष्ण मंदिर। कृष्ण मंदिर में मांगी हर मुराद होती है पूरी। इसलिए गांव का नाम रखा गया मुरादपुर। 

बिहार के सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मुरादपुर गांव स्थित श्री कृष्ण मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का भव्य आयोजन किया गया है। जहां श्री कृष्ण के जन्म से एक पखवाड़े पूर्व से ही ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक धोती पहन कर एवं जनेऊ धारण कर श्री कृष्ण के जन्म लेने के लिए लोक गायन नारदी को गा कर उनकी स्तुति की जाती है। यह 19 वी सदी के पूर्व से चली आ रही नारदी, लोक गायन की कला को मुरादपुर के ग्रामीण कलाकारों द्वारा ही पीढ़ी दर पीढ़ी संजोई चली आ रही है।

गांव के नारदी गायकों ने बताया कि नारदी भजन कीर्तन उनकी संस्कृति रही है। जिसमें श्री कृष्ण को अवतार लेकर आने के लिए गायन व लोक नृत्य के माध्यम से आह्वान किया जाता है। इसके हर बोल में भक्तों के दर्द को जताते हुए उन्हें धरती पर आकर उनके कष्ट को दूर करने की प्रलाप होती है। इसके गायन की परंपरा इसकी अलग पहचान दिखाती है। जो किसी भी कला से अलग होती है। इसलिए इस संस्कृति कि रक्षा मुरादपुर के युवाओं द्वारा की जा रही है। गांव के युवा पीढ़ी भी इस कला को संजोए आगे बढ़ा रहे है। अब गांव की चौथी पीढ़ी में भी यह परंपरा जीवित है। 

मुरादपुर को छोड़कर यह संस्कृति कहीं नहीं अब देखने को मिल रही है। नारदी भजन मुरादपुर की पहचान है। साथ ही गांव के जागृत कृष्ण मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती है। इस कारण पूर्वजों ने गांव का नाम मुरादपुर रखा था। वहीं मूर्तिकार मोहन के परदादा व दादा ही इस मंदिर में मूर्ति बनाते आए हैं। मूर्तिकार की तीसरी पीढ़ी मोहन मिस्त्री इस साल मूर्ति का निर्माण किया है।

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